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US Fed Rate Decision: नहीं बढ़ाई ब्याज दरें, पर दिसंबर में लग सकता है झटका

अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (FOMC) ने फिलहाल ब्याज दर नहीं बढ़ाने का फैसला लिया है। हालांकि, ज्यादातर जानकार 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की अपेक्षा कर रहे थे। इस तरह फेड ने बाजार को राहत दी है।

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फेड ने लगाई ब्याज दर पर लगाम

US Fed Rate Decision: अमेरिका के फेडरल केंद्रीय बैंक की ओपन मार्केट कमिटी (FOMC) ने ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया है। 28 अक्टूबर को हुई बैठक में बेंचमार्क ब्याज दर को 3.75%-4% के दायरे में बनाए रखने का फैसला किया। यह फैसला 10-2 के वोट से लिया गया।

फैसले में दो अधिकारियों ने असहमति जताते हुए ब्याज दरें 0.25% बढ़ाने की राय रखी। बहरहाल, अमेरिका में महंगाई बढ़कर 3.7% पहुंचने और अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बने रहने के बीच अब बाजार की नजर दिसंबर में होने वाली फेड की अगली बैठक पर रहेगी।

US Fed ने क्यों नहीं बदली ब्याज दरें?

फेड के चेयरमैन केविन वार्श ने ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला का ऐलान करते हुए कहा कि सितंबर में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी के बाद इस बार नई बढ़ोतरी से परहेज किया गया। समिति मानती है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए आगे का फैसला लेने से पहले आर्थिक आंकड़ों का और गहराई से आकलन करना जरूरी है।

Federal Open Market Committee (FOMC) ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका की आर्थिक गतिविधियां मजबूत रफ्तार से बढ़ रही हैं। घरेलू खर्च में मजबूती बनी हुई है, उत्पादकता में अच्छी वृद्धि हो रही है और पूंजी निवेश भी मजबूत है। रोजगार के मोर्चे पर भी स्थिति में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया है।

महंगाई को बताया चिंता का विषय

फेड के बयान में यह साफ किया गया है कि महंगाई अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। ऐसे में केंद्रीय बैंक के सामने महंगाई को अपने 2% के लक्ष्य की ओर लाने और आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने के बीच संतुलन कायम करने की चुनौती है।

क्यों की गई ब्याज दर बढ़ाने की मांग?

बैठक में ब्याज दरों को लेकर अधिकारियों के बीच मतभेद दिखे। गवर्नर लिसा कुक (Lisa Cook) और क्लीवलैंड फेड की अध्यक्ष बेथ हैमैक (Beth Hammack) ने ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले का विरोध किया। दोनों अधिकारियों ने ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी के पक्ष में वोट दिया। महंगाई कंट्रोल करने के लिए दोनों पहले भी सख्त मौद्रिक नीति का समर्थन कर चुकी हैं।

अमेरिका में अभी कितनी है महंगाई?

फेड के सामने सबसे बड़ी चुनौती महंगाई को नियंत्रित करना है। अमेरिका में सितंबर 2026 के दौरान कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में महीने-दर-महीने 0.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि अगस्त में यह वृद्धि 0.4% थी। सालाना आधार पर भी महंगाई दर अगस्त के 3.4% से बढ़कर सितंबर में 3.7% हो गई। सितंबर में पेट्रोल की कीमतों में 9.1% की तेजी आई, जबकि ऊर्जा सूचकांक 5.2% बढ़ा। इन बढ़ोतरी का कुल उपभोक्ता महंगाई पर खासा असर रहा।

अर्थव्यवस्था को लेकर रुख मजबूत

फेड ने अपने आर्थिक आकलन में बदलाव करते हुए कहा कि अमेरिका की आर्थिक गतिविधियां अब मजबूत गति से बढ़ रही हैं। सितंबर की बैठक में केंद्रीय बैंक ने अर्थव्यवस्था के विस्तार को मजबूत के बजाय अपेक्षाकृत सामान्य शब्दों में ‘सॉलिड’ बताया था, जबकि अब उसने ‘स्ट्रॉन्ग’ शब्द का इस्तेमाल किया है।

घरेलू खर्च, निवेश और उत्पादकता में मजबूती अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही है। इससे केंद्रीय बैंक को विकास के मोर्चे पर राहत मिलती है, लेकिन लगातार ऊंची महंगाई ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश सीमित कर सकती है।

क्या दिसंबर में बढ़ेगी ब्याज दर?

Fed की अगली बैठक 8-9 दिसंबर 2026 को होनी है। फिलहाल केंद्रीय बैंक ने यह स्पष्ट संकेत नहीं दिया है कि वह उस बैठक में ब्याज दरें बढ़ाएगा या नहीं। उसका कहना है कि आगे मिलने वाले आंकड़े ही मौद्रिक नीति की दिशा तय करने में मदद करेंगे। लेकिन, ब्याज दरों के वायदा बाजार में दिसंबर की बैठक में बढ़ोतरी की करीब 80% संभावना को कीमतों में शामिल किया जा रहा था।

भारतीय शेयर बाजार के लिए क्या मतलब?

अमेरिका में ब्याज दरों का फैसला भारतीय शेयर बाजार के लिए भी अहम है। ऊंची अमेरिकी ब्याज दरें डॉलर आधारित निवेश को आकर्षक बना सकती हैं, जिससे विदेशी निवेशकों के भारतीय शेयर बाजार में निवेश पर असर पड़ सकता है। इससे रुपये और भारतीय बाजारों पर भी दबाव बन सकता है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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