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World Wrestling Championship: काजल और नीलम विश्व कुश्ती चैंपियन बनने से चूकीं, सिल्वर मेडल से करना पड़ा संतोष

World Wrestling Championship: नीलम सिरोही और काजल ढोचक को बुधवार को यहां विश्व चैंपियनशिप के अपने-अपने फाइनल मुकाबलों में हार के साथ रजत पदक से संतोष करना पड़ा। हालांकि इन दोनों रजत पदक के साथ भारतीय महिला कुश्ती ने इतिहास रच दिया। विश्व चैंपियनशिप के एक ही टूर्नामेंट में पहली बार भारत की दो महिला पहलवानों ने स्वर्ण पदक के मुकाबलों में जगह बनाई थी।

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काजल ढोचक और नीलम सिरोही को विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल (United World Wrestling)

भारत को पहली महिला विश्व कुश्ती चैंपियन के लिए अभी इंतजार करना होगा क्योंकि नीलम सिरोही और काजल ढोचक को बुधवार को यहां विश्व चैंपियनशिप के अपने-अपने फाइनल मुकाबलों में हार के साथ रजत पदक से संतोष करना पड़ा। हालांकि इन दोनों रजत पदक के साथ भारतीय महिला कुश्ती ने इतिहास रच दिया। विश्व चैंपियनशिप के एक ही टूर्नामेंट में पहली बार भारत की दो महिला पहलवानों ने स्वर्ण पदक के मुकाबलों में जगह बनाई। सुशील कुमार 2010 में विश्व खिताब जीतने वाले भारत के एकमात्र पहलवान हैं।

नीलम सबसे पहले मैट पर उतरीं। महिला 50 किग्रा वर्ग के फाइनल में उनका सामना जापान की दिग्गज पहलवान युई सुसाकी से था। चार बार की विश्व चैंपियन सुसाकी ने फाइनल तक के अपने अभियान में एक भी अंक नहीं गंवाया था। सुसाकी के शानदार करियर में अब तक केवल एक हार रही है और ऐसे में उन्हें हराना नीलम के लिए बेहद कठिन चुनौती थी।

हालांकि नीलम ने करीब तीन मिनट तक उनका डटकर सामना किया लेकिन इसके बाद सुसाकी को हमला करने का मौका मिल गया। लय हासिल करने के बाद सुसाकी ने बाएं पैर से हमला करते हुए टेकडाउन किया और फिर भारतीय पहलवान को चित करके स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।इस जीत के साथ सुसाकी के विश्व खिताबों की संख्या पांच हो गई और उन्होंने अपने दौर की सबसे दबदबे वाली पहलवानों में अपनी जगह और मजबूत कर ली।

दूसरी ओर महिला 76 किग्रा वर्ग के फाइनल में काजल यूक्रेन की तीन बार की यूरोपीय चैंपियन अनास्तासिया अल्पयेयेवा के खिलाफ उलटफेर करने के बेहद करीब पहुंच गई थीं। मुकाबला कड़ा रहा और शुरुआती दौर में कोई भी पहलवान स्पष्ट बढ़त हासिल नहीं कर सकी। मैट से बाहर कदम रखने और निष्क्रियता के लिए अंक गंवाने के कारण काजल 0-2 से पिछड़ गईं।

भारतीय पहलवान ने पहले पीरियड के आखिर में प्रतिद्वंद्वी को मैट से बाहर धकेलकर स्कोर 2-2 कर दिया। दूसरे पीरियड में दोनों पहलवानों ने आक्रामक रुख अपनाया। अल्पयेयेवा ने डबल लेग हमले से अंक जुटाए लेकिन काजल ने भी इसी तरह का दांव लगाकर जवाब दिया और स्कोर 4-4 हो गया। इस दौरान यूक्रेनी पहलवान की नाक से खून निकलने लगा। आखिरी अंक हासिल करने के कारण काजल ’क्राइटेरिया’ के आधार पर आगे थीं।

मुकाबला खत्म होने में केवल 20 सेकेंड बचे थे तभी अल्पयेयेवा ने निर्णायक टेकडाउन किया और दो और अंक हासिल करके बढ़त बना ली।

काजल ने हार नहीं मानी और पांच सेकेंड शेष रहते दो अंकों का टेकडाउन करके मुकाबले को पलटने की आखिरी कोशिश की, लेकिन यूक्रेनी पहलवान ने अपनी बढ़त कायम रखते हुए 8-6 से जीत दर्ज की। दो बार की अंडर-20 विश्व चैंपियन काजल ने सेमीफाइनल में किर्गिस्तान की आइपेरी मेडेट काइजी के खिलाफ 1-7 से पिछड़ने के बाद जोरदार वापसी करते हुए 10-7 से जीत हासिल की थी।

फाइनल में मिली निराशा के बावजूद इन दोनों पदकों ने भारतीय महिला कुश्ती के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की। इस चैंपियनशिप से पहले सीनियर विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली भारत की एकमात्र महिला पहलवान अंशु मलिक थीं। भारतीय महिला टीम के मुख्य कोच वीरेंद्र दहिया काजल के स्वर्ण पदक से चूकने पर स्वाभाविक रूप से निराश थे।

दहिया ने पीटीआई से कहा, "काजल उस बहुप्रतीक्षित स्वर्ण पदक के बेहद करीब पहुंच गई थी। उसे बस 20 सेकेंड तक अपनी बढ़त बनाए रखनी थी। इस स्तर पर अनुभव की कमी के कारण ऐसा हुआ। हम लक्ष्य के बेहद करीब थे, आज रात सोना मुश्किल होगा। वह अभी बच्ची ही है और इस समय बहुत दुखी है। हमें पता था कि नीलम के लिए चुनौती कठिन होगी लेकिन काजल के पास स्वर्ण पदक जीतने का शानदार मौका था। इस प्रतियोगिता से उसे अनुभव मिला है। मुझे पूरा विश्वास है कि कल हम और पदक जीतेंगे। मनीषा और अहिल्या, दोनों पदक जीतने में सक्षम हैं।"

काजल के परिवार के सदस्य भी जाहिर तौर पर निराश थे और उन्होंने इस बारे में कोई बात नहीं की। इससे पहले दिन में तीन भारतीय पहलवान प्री क्वार्टर फाइनल में हार गईं जबकि एक को क्वालीफिकेशन दौर में हार का सामना करना पड़ा। महिला 65 किग्रा वर्ग में रजनीता का अभियान रेपेचेज दौर में जापान की नाना इकेहाता से 2-6 की हार के साथ समाप्त हो गया।

सबसे चौंकाने वाली हार 53 किग्रा वर्ग में निशु को मिली। उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत मोरक्को की सबाह कानेब को चित करके जीत के साथ की लेकिन प्री क्वार्टर फाइनल में रोमानिया की आंद्रीया बीट्रिस आना से 0-8 से हार गईं। महिला 68 किग्रा वर्ग में सृष्टि ने भी शानदार शुरुआत करते हुए उज्बेकिस्तान की फिरुजा एसेनबायेवा को 8-0 से हराया लेकिन प्री क्वार्टर फाइनल में किर्गिस्तान की मेरिम झुमनाजारोवा से 1-5 से हार गईं।

सृष्टि के पास अब भी रेपेचेज मुकाबला जीतकर पदक दौर में पहुंचने का मौका है। महिला 62 किग्रा वर्ग में नेहा सांगवान को रूस की शीर्ष वरीयता प्राप्त अमीना तंदेलोवा ने एकतरफा मुकाबले में हराया। तंदेलोवा ने केवल 76 सेकंड में जीत दर्ज की।

तनु शर्मा को क्वालीफिकेशन दौर में पोलैंड की विक्टोरिया चोलुज के खिलाफ 2-9 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि चोलुज के स्वर्ण पदक मुकाबले में पहुंचने के कारण तनु के पास रेपेचेज के जरिए कांस्य पदक की दौड़ में बने रहने का मौका है।

(भाषा)

Shivam Awasthi
शिवम अवस्थीauthor

शिवम् अवस्थी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स डेस्क के इंचार्ज हैं। इनको खेल पत्रकारिता में तकरीबन 17 सालों का अनुभव है। इनको क्रिकेट, फुटबॉल और टेनिस में खास रुचि है। उन्हें खेलना भी पसंद है और वो देहरादून में फुटबॉल व क्रिकेट इंटर डिस्ट्रिक्ट चैंपियनशिप में विजेता टीम के कप्तान भी रहे। पत्रकारिता में कदम रखने के कुछ समय बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 का संपूर्ण फील्ड कवरेज किया और कई ब्रेकिंग न्यूज दी। कई चर्चित भारतीय एथलीटों के इंटरव्यू लिए हैं। 2011 वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप का ऑनफील्ड रहकर शहर-शहर घूमते हुए पूरा टीवी कवरेज किया। विश्व कप से पहले युवा विराट कोहली का इंटरव्यू किया। डिजिटल जैसे-जैसे आगे बढ़ा उन्हें ब्रेट ली, सुनील गावस्कर, राहुल द्रविड़, जैसे तमाम धुरंधरों के साक्षात्कार किए और 16 वर्षीय ऋषभ पंत का पहला डिजिटल इंटरव्यू किया जिसे इंग्लिश और हिंदी वेबसाइट पर काफी रीडरशिप मिली। उन्होंने स्पोर्ट्स मल्टी पॉडकास्ट भी किया। आईपीएल के 18 सीजन से ऑनफील्ड जुड़े रहे। अब तक तकरीबन 6000 से ज्यादा एक्सक्लूसिव स्टोरीज लिख चुके हैं। साल 2025 में खेल जगत के तमाम बड़े रिकॉर्ड्स व आंकड़ों को ट्रैक किया है और उन पर आर्टिकल तैयार किए हैं।

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