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MCD सदन में जबरदस्त हंगामा, कांग्रेस से झड़प के बाद AAP पार्षदों ने BJP मेयर का छीना माइक

आम आदमी पार्टी (AAP) के मुताबिक, दानिश ने कथित तौर पर चौधरी के खिलाफ गाली-गलौज की और पर्सनल बातें कहीं, जिन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र के लोगों के अधिकारों की रक्षा और विकास पक्का करने के लिए फंड की मांग की थी।

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MCD सदन में विपक्ष का हंगामा

दिल्ली नगर निगम (MCD) हाउस में गुरुवार को तब बड़ा ड्रामा हुआ जब AAP पार्षदों ने कथित तौर पर एक कमेटी मीटिंग में कांग्रेस पार्षदों के साथ तीखी बहस के दौरान मेयर और BJP नेता प्रवेश वाही का माइक्रोफोन छीन लिया और तोड़ दिया। यह हंगामा तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता नाज़िया दानिश और AAP पार्षद शगुफ्ता ज़ुबैर चौधरी के बीच उनके इलाके के विकास और फंड के बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर बहस हो गई।

आम आदमी पार्टी (AAP) के मुताबिक, दानिश ने कथित तौर पर चौधरी के खिलाफ गाली-गलौज की और पर्सनल बातें कहीं, जिन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र के लोगों के अधिकारों की रक्षा और विकास पक्का करने के लिए फंड की मांग की थी। इस बहस के बाद AAP पार्षद पोडियम पर चढ़ गए, मेयर का माइक्रोफोन छीन लिया और उसे तोड़ दिया। उन्होंने सदन के अंदर मेयर प्रवेश वाही और कांग्रेस नेता नाजिया दानिश से माफी मांगने की भी मांग की।

AAP ने BJP शासित MCD पर आवाज़ दबाने का आरोप लगाया

AAP ने BJP की MCD पर आरोप लगाया कि वह उन पार्षदों को चुप कराने की कोशिश कर रही है जो लोगों की शिकायतें उठाते हैं और अपने इलाकों के लिए डेवलपमेंट फंड की मांग करते हैं।

पार्टी ने आरोप लगाया कि लोगों के अधिकारों और विकास से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय, सिविक बॉडी चुने हुए प्रतिनिधियों की आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही है। इस घटना से कमेटी मीटिंग के दौरान भारी हंगामा हुआ, जिससे पार्षदों के बीच तनाव बढ़ने से कार्यवाही में रुकावट आई।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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