अंतरिक्ष की दुनिया में जापान ने एक ऐसा मिशन शुरू किया है, जो मंगल ग्रह के दो छोटे चंद्रमाओं के बारे में हमारी समझ बदल सकता है। जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA ने MMX यानी Martian Moons Exploration मिशन के तहत एक अंतरिक्ष यान मंगल की ओर रवाना किया है। यह एक बिना चालक दल वाला मिशन है, जिसका मुख्य लक्ष्य मंगल के सबसे नजदीकी चंद्रमा 'फोबोस' की सतह से मिट्टी, धूल और चट्टानों के नमूने इकट्ठा करके धरती पर लाना है। यह H3 रॉकेट से जापान के 'तनेगाशिमा स्पेस सेंटर' से रवाना किया गया। इस मिशन में जापान के साथ अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी भी सहयोग कर रहे हैं। योजना के अनुसार, अंतरिक्ष यान मंगल के चांद पर जाएगा और नमूने लेकर लौटेगा। इसके धरती पर लौटने की अवधि 2031 है।
मंगल के चंद्रमाओं पर क्यों टिकी है नजर
पृथ्वी का एक चांद है, लेकिन मंगल के दो प्राकृतिक चंद्रमा हैं - 'फोबोस' और 'डिमोस'। फोबोस आकार में ज्यादा बड़ा है और मंगल के ज्यादा करीब चक्कर लगाता है। यह करीब 22 किलोमीटर चौड़ा, यह दिखने में किसी अनियमित आकार का पिंड जैसा है।
Japan MMX Mission
वैज्ञानिकों के सामने एक बड़ा सवाल है कि ये दोनों चंद्रमा कैसे बने होंगे? क्या किसी बड़े अंतरिक्ष पिंड के मंगल से टकराने के बाद निकले मलबे से इनका जन्म हुआ था, या ये कभी स्वतंत्र रूप से घूमने वाले क्षुद्रग्रह थे, जिन्हें मंगल के गुरुत्वाकर्षण ने अपनी ओर खींच लिया? सवाल तो कई हैं, जिनके जवाब मिलने में वक्त लगेगा, लेकिन यह जानकारी दिलचस्प होने वाली है।
स्टडी का फोकस क्या है?
फोबोस की मिट्टी और चट्टानों की जांच से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। नमूनों में मंगल से आया पदार्थ मिलने की संभावना है, जिससे वैज्ञानिकों को ग्रह के इतिहास को समझने में मदद मिल सकती है।
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मिशन पर क्या करेगा रोबोट?
MMX मिशन का अंतरिक्ष यान मंगल के पास पहुंचकर फोबोस की कक्षा में काम करेगा। इसके साथ एक छोटा फ्रांस-जर्मनी निर्मित रोवर भी भेजा गया है, जिसका नाम आइडेफिक्स (Idefix) है। यह फोबोस की सतह पर उतरकर वहां की जमीन और रास्तों की जांच करेगा।
Japan MMX Mission
रोवर का काम बेहद चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि फोबोस का गुरुत्वाकर्षण बहुत कम है। वहां उतरने के बाद रोवर कुछ देर तक उछल सकता है। यह करीब 100 दिनों तक सतह का निरीक्षण करेगा और ऐसे स्थानों की पहचान करने में मदद करेगा, जहां मुख्य अंतरिक्ष यान सुरक्षित तरीके से नमूने जुटा सके।
इसके बाद मिशन का लैंडर फोबोस की सतह पर थोड़े समय के लिए उतरेगा। योजना के अनुसार, वह ड्रिल और वैक्यूम सिस्टम की मदद से कम से कम 10 ग्राम मिट्टी और चट्टानों का पदार्थ इकट्ठा करेगा। फिर नमूनों को लेकर धरती की ओर वापसी शुरू होगी।
क्या इससे जीवन के बारे में भी पता चलेगा?
यह मिशन सीधे मंगल पर जीवन खोजने के लिए नहीं है। हालांकि, फोबोस पर मौजूद पदार्थों का अध्ययन मंगल के पुराने वातावरण और उसके इतिहास से जुड़ी जानकारी दे सकता है। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि ग्रहों और उनके चंद्रमाओं का निर्माण कैसे हुआ।
जापान पहले क्षुद्रग्रहों से नमूने धरती पर लाने वाले मिशनों में सफलता हासिल कर चुका है। अब वही अनुभव मंगल के चंद्रमाओं पर आजमाया जा रहा है। चीन भी मंगल से नमूने लाने की योजना पर काम कर रहा है। अगर MMX सफल रहता है, तो यह मंगल के आसपास के क्षेत्र से नमूने धरती पर लाने वाला पहला मिशन बन सकता है।
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