वेव सिटी, गाजियाबाद। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां वेव सिटी के विकास कार्यों में अड़चने पैदा करने का आरोप लगे हैं, बताया जा रहा है कि कुछ किसान नेता लगातार कार्य में बाधा पहुंचा रहे हैं। कहा ये भी जा रहा है कि विवाद इस कदर बढ़ गया कि यहां लोगों को खुलेआम डराया-धमकाया जा रहा है।
किसान नेता समझौते की शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। आरोप है कि वेब सिटी में जाकर लोगों को डराने-धमकाने से लेकर जबरन रोड जाम करना और कर्मचारियों के साथ छेड़छाड़ करना आम बात हो गई है। लोगों का कहना है कि इसके बारे में शिकायत भी दर्ज कराई गई, लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बावजूद प्रशासन की ओर से इस ओर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई।
पिछले कई दिनों में वेव सिटी से कई ऐसे प्रकरण सामने आए हैं जिससे वहां के लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि कुछ बाहरी नेता किसानों के नाम पर कंपनी को लगातार ब्लैकमेल करने का काम कर रहे हैं। वेव सिटी प्रबंधन ने इन पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है। वेव सिटी में कार्यरत कर्मचारियों का कहना है कि छोटे समूह में कुछ तथाकथित किसान नेता आकर जबरन गेट पर नारेबाजी करने लगते हैं और कर्मचारियों के साथ अभ्रदता करते हैं। जबकि प्रबंधन का दावा है कि किसान समझौतों की शर्तों को सिरे से नकार रहे हैं।
वेव सिटी के चीफ आपरेटिंग आफिसर सीजे सिंह का कहना है कि समझौते की शर्तों को 2014 में कंपनी ने मान लिया जो समय सीमा निर्धारित थी, उसमें हमने पूरा कर दिया। समझौते के बिंदु संख्या तीन को हम इसलिए नहीं मान रहे हैं कि इसकी समय सीमा खत्म हो गई है। 11 साल बाद फिर यह मांग क्यों उठ रही है यह समझ से परे है।
बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से 25 मई 2014 को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की अध्यक्षता में हाईटेक सिटी विकासकर्ता कंपनी के प्रतिनिधिगण, प्रशासनिक अधिकारीगण एवं हाईटेक सिटी के गांव महरौली, सादिकपुर, काजीपुरा, बयाना, नायफल, शाहपुर बम्हैटा, इनायतपुर, आरिफपुर व सादतनगर इकला के समस्त किसानों ने भाग लिया। जिसमें सर्वसम्मति से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ। समझौता पत्र के मुताबिक विकासकर्ता कंपनी के विकास कार्यों को निर्बाध रूप से पूर्ण किए जाने के लिए सभी किसान एवं किसान प्रतिनिधि सहयोग करेंगे एवं किसी भी स्थिति में विकास कार्यों में कोई व्यवधान नहीं करेंगे। लेकिन उक्त समझौतों के बावजूद आए दिन किसानों की ओर से प्रदर्शन हो रहे हैं। ये विवाद दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।