गाजियाबाद

गाजियाबाद की वेव सिटी के विकास कार्यों में बाधा पहुंचाने की बात आई सामने; बाहरी किसान नेताओं पर लगे आरोप

पिछले कई दिनों से वेव सिटी के विकास कार्यों में बाधा पहुंचाने का माजरा सामने आ रहा है। इसके लिए कुछ बाहरी किसान नेताओं पर आरोप लग रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि कुछ बाहरी नेता किसानों के नाम पर लगातार ब्लैकमेल कर रहे हैं। आपको बताते हैं कि आखिर माजरा क्या है।

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वेव सिटी, गाजियाबाद। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां वेव सिटी के विकास कार्यों में अड़चने पैदा करने का आरोप लगे हैं, बताया जा रहा है कि कुछ किसान नेता लगातार कार्य में बाधा पहुंचा रहे हैं। कहा ये भी जा रहा है कि विवाद इस कदर बढ़ गया कि यहां लोगों को खुलेआम डराया-धमकाया जा रहा है।

लोगों को डराने-धमकाने का आरोप

किसान नेता समझौते की शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। आरोप है कि वेब सिटी में जाकर लोगों को डराने-धमकाने से लेकर जबरन रोड जाम करना और कर्मचारियों के साथ छेड़छाड़ करना आम बात हो गई है। लोगों का कहना है कि इसके बारे में शिकायत भी दर्ज कराई गई, लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बावजूद प्रशासन की ओर से इस ओर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई।

आखिर क्या है विवाद?

पिछले कई दिनों में वेव सिटी से कई ऐसे प्रकरण सामने आए हैं जिससे वहां के लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि कुछ बाहरी नेता किसानों के नाम पर कंपनी को लगातार ब्लैकमेल करने का काम कर रहे हैं। वेव सिटी प्रबंधन ने इन पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है। वेव सिटी में कार्यरत कर्मचारियों का कहना है कि छोटे समूह में कुछ तथाकथित किसान नेता आकर जबरन गेट पर नारेबाजी करने लगते हैं और कर्मचारियों के साथ अभ्रदता करते हैं। जबकि प्रबंधन का दावा है कि किसान समझौतों की शर्तों को सिरे से नकार रहे हैं।

11 साल बाद फिर उठ रही है मांग

वेव सिटी के चीफ आपरेटिंग आफिसर सीजे सिंह का कहना है कि समझौते की शर्तों को 2014 में कंपनी ने मान लिया जो समय सीमा निर्धारित थी, उसमें हमने पूरा कर दिया। समझौते के बिंदु संख्या तीन को हम इसलिए नहीं मान रहे हैं कि इसकी समय सीमा खत्म हो गई है। 11 साल बाद फिर यह मांग क्यों उठ रही है यह समझ से परे है।

बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से 25 मई 2014 को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की अध्यक्षता में हाईटेक सिटी विकासकर्ता कंपनी के प्रतिनिधिगण, प्रशासनिक अधिकारीगण एवं हाईटेक सिटी के गांव महरौली, सादिकपुर, काजीपुरा, बयाना, नायफल, शाहपुर बम्हैटा, इनायतपुर, आरिफपुर व सादतनगर इकला के समस्त किसानों ने भाग लिया। जिसमें सर्वसम्मति से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ। समझौता पत्र के मुताबिक विकासकर्ता कंपनी के विकास कार्यों को निर्बाध रूप से पूर्ण किए जाने के लिए सभी किसान एवं किसान प्रतिनिधि सहयोग करेंगे एवं किसी भी स्थिति में विकास कार्यों में कोई व्यवधान नहीं करेंगे। लेकिन उक्त समझौतों के बावजूद आए दिन किसानों की ओर से प्रदर्शन हो रहे हैं। ये विवाद दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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