गाजियाबाद

सावधान! कहीं आप भी तो नहीं खा रहे नकली पनीर, खाद्य विभाग ने जब्त किया 100 KG; दिल्ली में पकड़ा गया नकली मावा

गाजियाबाद के साहिबाबाद मंडी में कई 100 किलो नकली पनीर खाद्य सुरक्षा विभाग ने पकड़ा है। आधी रात में की गई छापेमारी से सभी लोग हैरान हो गए मुखबिर की सटीक जानकारी पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई कर कई 100 किलो नकली पनीर जप्त किया।

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गाजियाबाद में पकड़ा गया नकली पनीर

गाजियाबाद : त्योहारों के सीजन में खाद्य सुरक्षा विभाग भी पूरी तरीके से हाई अलर्ट पर आ जाता है गाजियाबाद के साहिबाबाद मंडी में कई 100 किलो नकली पनीर खाद्य सुरक्षा विभाग ने पकड़ा है। आधी रात में की गई छापेमारी से सभी लोग हैरान हो गए मुखबिर की सटीक जानकारी पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई कर कई 100 किलो नकली पनीर जब्त किया। जिसके बाद आज उस नकली पनीर को जमीन के अंदर गड़ा गया है। आप कल्पना कीजिए त्योहारों का सीजन है और यदि आप नकली पनीर से निर्मित मिठाई या पकवान खाते हैं तो आपकी तबियत कितनी खराब होगी?

आप कल्पना इस चीज की भी कर सकते हैं कि और जगह पर कहां-कहां यह सप्लाई कर दिया गया होगा, वहां से भी आप यदि खरीदारी करते हैं तो सीधे तौर पर आपके स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ेगा। लेकिन खाद्य सुरक्षा अधिकारी अरविंद यादव की टीम ने कार्रवाई करते हुए पलवल से अवैध रूप से लाये गए। इस पनीर की बड़ी खेप को बरामद करते हुए इसे पूरी तरीके से निष्क्रिय किया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि आगे भी इस तरह की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

दिल्ली में पकड़ा गया नकली मावा

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने रघुवीर नगर स्थित एक फैक्ट्री पर छापा मारकर लगभग 5,000 किलो नकली मावा और खोया ज़ब्त किया। क्राइम ब्रांच टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर, अधिकारियों ने नकली डेयरी उत्पाद बनाने वाली फैक्ट्री का पता लगाया छापेमारी में 5,000 किलो नकली मावा और खोया ज़ब्त किया। जांच जारी है और फैक्ट्री का गहन निरीक्षण किया जा रहा है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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