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हजारों किलोमीटर का सफर तय करके भारत के इस 'महातीर्थ' में खत्म होती है गंगा की यात्रा, यहां है मौजूद

गंगोत्री से निकलकर हजारों किलोमीटर का सफर तय करने वाली गंगा नदी भारत की आस्था, संस्कृति और जीवन की प्रमुख धारा मानी जाती है। पर सवाल यह उठता है कि भारत के कई राज्यों में बहकर गंगा की यात्रा आखिर कहां खत्म होती है? आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं।

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गंगा का अंतिम पड़ाव

Photo : iStock

Where Ganga River Ends: गंगा नदी भारत की सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण नदियों में से एक मानी जाती है। इसका उद्गम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री ग्लेशियर के अंतिम छोर गौमुख नामक जगह से होता है, जहां से यह भागीरथी के रूप में निकलकर आगे चलकर अलकनंदा से मिलती है और गंगा कहलाती है। लगभग 2525 किलोमीटर लंबी यह नदी उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों से होकर बहती है। गंगा की मान्यता हजारों साल पुरानी मानी जाती है। गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और जीवन का अभिन्न हिस्सा है। लाखों लोग इसे मां गंगा कहकर पुकारते हैं और इसके जल को पवित्र मानते हैं।

Formation of Ganga At Devprayag, Uttarakhand

उत्तराखंड के देवप्रयाग में स्थित संगम

करोड़ों लोगों की जीवन धारा

धार्मिक दृष्टि से गंगा स्नान को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग माना जाता है। हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज जैसे प्रमुख तीर्थ स्थल गंगा के तट पर बसे हुए हैं, जहां साल भर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। इसके अलावा गंगा नदी कृषि, पेयजल और मत्स्य पालन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अपने किनारे बसे करोड़ों लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। लेकिन क्या आपने यह सोचा है कि, पर्वतों की गोद से निकली गंगा का अंतिम पड़ाव कहां है? आखिर अंत में कहां जाकर इसकी अविरल और निर्मल धारा मिलती है? अगर नहीं तो आइए जानें इसके बारे में।

यहां खत्म होती है गंगा की यात्रा

गंगासागर पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में है। यह स्थान कोलकाता से लगभग 117 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और सुंदरबन डेल्टा का हिस्सा माना जाता है। हालांकि इसकी पहचान केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि धार्मिक महत्व के कारण भी बहुत अधिक है। हर साल मकर संक्रांति (जनवरी मध्य) में यहां भव्य गंगासागर मेला आयोजित किया जाता है। यह मेला उस स्थान पर लगता है जहां गंगा नदी बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है। इसी संगम स्थल को गंगासागर के नाम से जाना जाता है, जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहीं पर गंगा की यात्रा खत्म होती है।

Significance of Gangasagar

गंगासागर का महत्व

गंगासागर क्यों कहलाता है 'महातीर्थ'?

भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में गंगासागर को विशेष रूप से महातीर्थ का दर्जा दिया जाता है। प्रसिद्ध कहावत “सारे तीर्थ बार-बार, गंगा सागर एक बार” इसी आस्था को दर्शाती है। पुराने समय में गंगासागर की यात्रा करना आसान नहीं था। आधुनिक साधनों और सुविधाओं के अभाव के कारण यहां तक पहुंचना बहुत कठिन माना जाता था, इसलिए केवल कुछ ही श्रद्धालु इस पवित्र स्थल तक पहुंच पाते थे। उस दौर में यह स्थान अधिकतर जलमार्ग से ही सुलभ था, जिससे यात्रा और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती थी हालांकि अब परिवहन व्यवस्था और बुनियादी ढांचे में हुए विकास के कारण गंगासागर जाना पहले की तुलना में काफी सरल और सुविधाजनक हो गया है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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