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डंकी रूट से अमेरिका भेजने वाला एजेंट गिरफ्तार, ED ने दिल्ली में पकड़ा, छापे में बरामद हुए करोड़ों रुपये

Dunki Route America Case: ED की जांच पंजाब और हरियाणा पुलिस की ओर से दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी। जांच में सामने आया कि अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों को एजेंट और बिचौलिए कानूनी तरीके से विदेश भेजने का झांसा देते थे, लेकिन बाद में उन्हें डंकी रूट के जरिए अमेरिका पहुंचाने की व्यवस्था की जाती थी।

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प्रवर्तन निदेशालय (फोटो साभार- PTI)

Dunki Route America Case: अमेरिका में अवैध तरीके से दाखिल होने के आरोप में फरवरी 2025 में 300 से ज्यादा भारतीयों को वापस भेजे जाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। ED के जालंधर जोनल ऑफिस ने दिल्ली के टिकट एजेंट तरुण खोसला को गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि वह डंकी रूट के जरिए लोगों को अवैध तरीके से अमेरिका भेजने वाले नेटवर्क का अहम हिस्सा था। विशेष PMLA अदालत ने उसे 30 अक्टूबर 2026 तक ED की हिरासत में भेज दिया है।

वसूले जाते थे 30 से 60 लाख रुपये

ED की जांच पंजाब और हरियाणा पुलिस की ओर से दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी। जांच में सामने आया कि अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों को एजेंट और बिचौलिए कानूनी तरीके से विदेश भेजने का झांसा देते थे, लेकिन बाद में उन्हें डंकी रूट के जरिए अमेरिका पहुंचाने की व्यवस्था की जाती थी। इस खतरनाक रास्ते में दक्षिण और मध्य अमेरिका के कई देशों की सीमाएं अवैध तरीके से पार कराई जाती थीं। इसके लिए स्थानीय एजेंटों और डंकरों की मदद ली जाती थी। हर व्यक्ति से करीब 30 लाख से 60 लाख रुपये तक वसूले जाते थे।

ED ने इस मामले में जुलाई 2025 में 19 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान संदिग्ध दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और निकारागुआ व इथियोपिया से जुड़े फर्जी इमिग्रेशन और वीजा स्टांप बरामद किए गए थे। इसके बाद दिसंबर 2025 में एजेंटों से जुड़ी करीब 5.41 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया था। 18 और 19 दिसंबर 2025 को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में कई ठिकानों पर की गई तलाशी के दौरान तरुण खोसला के परिसरों से 4.62 करोड़ रुपये नकद, करीब 5.9 किलोग्राम सोने की छड़ें और सिक्के तथा लगभग 313 किलोग्राम चांदी की छड़ें बरामद की गई थीं। नकदी, सोने और चांदी की कुल कीमत करीब 19.14 करोड़ रुपये बताई गई थी। अन्य ठिकानों से 50 से ज्यादा लोगों के मूल पासपोर्ट, लेनदेन का रिकॉर्ड, डायरियां, संपत्ति के दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी मिले थे।

छापे में नकद बरामद हुए 4.62 करोड़ रुपये

ED के मुताबिक, तरुण खोसला पंजाब और हरियाणा के एजेंटों से लोगों के पासपोर्ट और पैसे लेता था। इसके बाद दिल्ली से दक्षिण अमेरिकी देशों गुयाना, सूरीनाम, इक्वाडोर और अल सल्वाडोर जैसे देशों के लिए वीजा और हवाई टिकट का इंतजाम करता था। वहां से लोगों को अवैध और खतरनाक रास्तों के जरिए अमेरिकी सीमा तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाती थी। जांच एजेंसी को उसके मोबाइल फोन से मिली चैट में विदेशी संपर्कों के साथ बातचीत के सबूत मिले हैं। आरोप है कि वह विदेशी एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन क्लीयरेंस, यात्रियों के इंतजाम, टिकट बुकिंग और अमेरिकी डॉलर में भुगतान से जुड़ी गतिविधियों में शामिल था। ED के अनुसार, वह फर्जी येलो फीवर टीकाकरण प्रमाणपत्र बनवाने और विदेशी एजेंटों के साथ तालमेल बैठाने में भी मदद करता था।

जांच में मेक्सिको में माइक और क्रिस्टी तथा ब्राजील में अली नाम के संपर्कों से बातचीत का भी पता चला है। आरोप है कि ये लोग सीमाएं पार कराने वाले स्थानीय एजेंटों यानी डंकरों और उनसे जुड़े भुगतान का इंतजाम करते थे। ED की जांच में तरुण खोसला की प्रोपराइटरशिप फर्म एम/एस बीजे इंटरनेशनल के बैंक खाते में वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच 414 लेनदेन के जरिए 30.38 करोड़ रुपये नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी को शक है कि यह रकम अवैध तरीके से लोगों को विदेश भेजने के कारोबार से जुड़ी हो सकती है। ED के मुताबिक, यह नेटवर्क कई साल से संगठित तरीके से काम कर रहा था। इसमें एजेंट और बिचौलिए लोगों को विदेश भेजने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलते थे और पूरी यात्रा का इंतजाम करते थे। मामले में पैसों के लेनदेन, विदेशी संपर्कों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है।

Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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