देश के नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए जरूरी खबर है। NH और एक्सप्रेसवे पर अब मौसम के हिसाब से स्पीड लिमिट तय होगी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क हादसों को कम करने के लिए डायनमिक स्पीड लिमिट सिस्टम लागू करने की योजना बनाई है। नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों का ऑटोमैटिक ई-चालान काटा जाएगा। यह तकनीक सेंसर, वेदर स्टेशन और रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम के माध्यम से काम करेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मानसून में ये सिस्टम सिर्फ चुनिंदा हाईवे और एक्सप्रसेवे पर लागू किया जाएगा।
अब मौसम तय करेगा हाईवे की रफ्तार
नई व्यवस्था के मुताबिक, मौसम साफ रहने पर कारों के लिए हाईवे पर अधिकतम स्पीड 100 किमी प्रति घंटा और एक्सप्रेसवे पर 120 किमी प्रति घंटा तक होगी। लेकिन बारिश, घना कोहरा, धूलभरी आंधी या अन्य खराब मौसम की स्थिति में स्पीड लिमिट घटाकर 60 से 80 किमी प्रति घंटा कर दी जाएगी। अगर कोई चालक तय स्पीड लिमिट का पालन नहीं करता है तो उसका ई-चालान स्वतः जारी होगा, जो उसके मोबाइल या ईमेल पर भेज दिया जाएगा।
इस सिस्टम में हाईवे पर अत्याधुनिक विजिबिलिटी सेंसर और वेदर स्टेशन लगाए गए हैं। ये सेंसर मौसम और विजिबिलिटी की रियल टाइम जानकारी NHAI के ट्रैफिक मैनेजमेंट सेंटर तक पहुंचाएंगे। इसके बाद कंट्रोल रूम से हाईवे पर लगे डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड, वाहन चालकों के मोबाइल फोन और कारों की स्क्रीन पर अलर्ट भेज दिया जाएगा, जिससे चालक समय रहते अपनी गति को तय स्पीड लिमिट के अनुसार कर सकें।
ड्राइवरों के मोबाइल पर आएगा अलर्ट
इस योजना के तहत जियो-फेंसिंग तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें प्रभावित क्षेत्र के आसपास एक वर्चुअल सेफ्टी बाउंड्री बनाई जाएगी, जैसे ही कोई वाहन इस एरिया में प्रवेश करेगा, चालक के मोबाइल पर स्थानीय टेलीकॉम नेटवर्क के माध्यम से अलर्ट मैसेज पहुंच जाएगा। इसके लिए इंटरनेट की भी जरूरत नहीं होगी, क्योंकि इसमें सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक का इस्तेमाल होगा।
मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, आईआईटी विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए सिमुलेशन मॉडल से अनुमान है कि डायनमिक स्पीड लिमिट और रियल टाइम अलर्ट सिस्टम लागू होने के बाद सड़क हादसों में 70 से 80 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। पहले चरण में इस व्यवस्था को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और यूपी के गंगा एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाएगा। परीक्षण सफल होने के बाद इसे देश के अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे और दुर्घटना संभावित नेशनल हाईवे पर भी लागू किया जाएगा।
