दिल्ली

न्याय व्यवस्था में चुनौती बन रहे लंबित मामले, 5 करोड़ से ज्यादा केस पेंडिंग; क्या बोले पूर्व CJI

पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल ने कहा कि न्याय मिलने में देरी आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और न्यायपालिका में भरोसे को प्रभावित करती है।

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कोर्ट (फोटो-Istock)

दिल्ली : भारतीय न्यायिक व्यवस्था इस समय लंबित मामलों के भारी बोझ से जूझ रही है। सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और जिला अदालतों समेत देशभर के कोर्ट में करोड़ों मामले वर्षों से लंबित पड़े हैं, जिससे आम लोगों को समय पर न्याय मिलना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। न्याय मिलने में देरी का सीधा असर न्यायपालिका में जनता के विश्वास पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जजों की कमी, धीमी न्यायिक प्रक्रिया, बार-बार स्थगन और बढ़ते मुकदमों के कारण स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है, जिसके समाधान के लिए व्यापक न्यायिक सुधारों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी विषय पर दिल्ली स्थित संविधान क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक बौद्धिक विमर्श में देश की न्यायिक व्यवस्था के समक्ष खड़ी चुनौतियों और लंबित मामलों की गंभीर समस्या पर चिंता जताई गई।

भारतीय विधिक व्यवस्था की एक समीक्षा” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी समेत कई विधि विशेषज्ञों ने न्यायिक सुधारों की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का आयोजन जिज्ञासा संस्था के 10वें स्थापना दिवस पर किया गया।

अदालतों में लंबित मामलों की संख्या अब लगभग 5.4 करोड़

आंकड़ों के मुताबिक, देश की अदालतों में लंबित मामलों की संख्या अब लगभग 5.4 करोड़ तक पहुंच चुकी है, जो न्याय व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बन गई है। इनमें सबसे अधिक मामले जिला अदालतों में लंबित हैं, जबकि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी लाखों मुकदमे वर्षों से लंबित पड़े हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि न्याय मिलने में देरी आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और न्यायपालिका में भरोसे को प्रभावित करती है।

चर्चा के दौरान न्यायिक जवाबदेही, पुलिस सुधार, वैकल्पिक विवाद निवारण प्रणाली, मध्यस्थता और तकनीक आधारित न्यायिक प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। वक्ताओं का मानना था कि अदालतों में जजों की संख्या बढ़ाने, डिजिटल सुनवाई को मजबूत करने और प्रक्रियागत सुधार लागू करने से मामलों के तेजी से निस्तारण में मदद मिल सकती है। न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध बनाने की जरूरत है, ताकि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों तक भी न्याय आसानी से पहुंच सके। संवाद सत्र में विधि व्यवसायियों की राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता में भूमिका पर भी चर्चा हुई।

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Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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