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दिल्ली पुलिस के हाथ हुए मजबूत, जानें नए सिस्टम से कैसे खुलेगी अपराधियों की क्राइम कुंडली

केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर शुरू किए गए ICJS सिस्टम की मदद से दिल्ली पुलिस अपराधियों की क्राइम कुंडली को मिनटों में खंगाल सकती है। इस सिस्टम के शुरुआती नतीजे काफी सकारात्मक नजर आ रहे हैं। इससे हाल ही में तीन साल पुराने दो मामलों को सुलझाया गया है।

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दिल्ली पुलिस (फाइल फोटो)

Photo : iStock

Delhi Police: दिल्ली पुलिस को अपराधियों का डाटा खंगालने में इंटर-आपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आइसीजेएस) सिस्टम बड़ी मदद कर रहा है। इस सिस्टम को केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर शुरू किया गया था। जिसके बाद शुरुआती परिणाम पॉजिटिव नजर आ रहे हैं। इस सिस्टम की मदद से दिल्ली पुलिस को अपराधियों की पूरी जानकारी कुछ मिनटों में ही आसानी से मिल रही है। इस सिस्टम के तहत पुलिस, कोर्ट, जेल, अभियोजन, फॉरेंसिक लैब और अस्पतालों को जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है। हालांकि पहले ही कुछ एजेंसियों को जोड़ा जा चुका है। लेकिन अभी इस नेटवर्क में अस्पताल नहीं पाया है। अस्पतालों के जुड़ने के पोस्टमार्टम और घायलों की रिपोर्ट मिलने में भी काफी आसानी होगी।

इस सिस्टम से 3 साल पुराने 2 मामले सुलझे

इंटर-आपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) ऐसा प्लटेफॉर्म है, जो विभिन्न जांच एजेंसियों को आपस में जोड़कर अपराधियों और मुकदमों से जुड़ी जानकारी को इकट्ठा करता है, जिससे जांच प्रक्रिया तेज और ज्यादा प्रभावी बन रही है। हाल ही में दिल्ली की तिलक नगर थाना पुलिस को चोरी के एक मामले में आइसीजेएस सिस्टम की मदद से बड़ी कामयाबी मिली। पुलिस ने इस मामले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया था। जिसके पुराने अपराधों की जानकारी मिनटों में इस सिस्टम से मिल गई। पुलिस ने जैसे ही आरोपी के फिंगरप्रिंट को ICJS पर अपलोड किया गया, मिनटों में यह खुलासा हुआ कि आरोपी ने पहले भी 2023 में सरिता विहार 40 लाख और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में 35 लाख रुपये की चोरी को अंजाम दिया था। जिससे 3 साल पुरानों दोनों मामले सुलझ गए।

क्या है ICJS सिस्टम?

ICJS का उद्देश्य है कि सभी संबंधित एजेंसियों और मुकदमों से जुड़ी हर जानकारी को एक मंच पर लाना है, जिससे अपराध से जुड़ी हर जरूरी जानकारी साझा की जा सके। इससे जांच प्रक्रिया में देरी नहीं होगी और अपराधियों को जल्दी पकड़ा जा सकता है। हालांकि, देशभर की सभी एजेंसियों को इस सिस्टम से पूरी तरह जोड़ने में अभी लगभग दो साल का समय लग सकता है। इससे पहले गृह मंत्रालय ने साल 2012 में अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (CCTNS) शुरू किया था। यह सिस्टम कामन इंटीग्रेटेड पुलिस एप्लीकेशन (CIPA) पर आधारित है। यह केवल पुलिस विभागों को आपस में जोड़ता है। इससे राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो भी जुड़ा हुआ है। हालांकि इस सिस्टम से उम्मीद के मुताबिक प्रभाव नहीं दिखा। इसकी कमी को दूर करने के लिए आइसीजेएस को बनाया गया है।

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Pooja Kumari
पूजा कुमारीauthor

पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।

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