दिल्ली

AAP की मनोनीत नियुक्तियों पर गिरी गाज, बीजेपी सरकार ने रद्द किए 177 पद

दिल्ली में रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने आम आदमी पार्टी की 177 मनोनीत नियुक्तियों को कैंसिल कर दिया है। बीजेपी सरकार ने आदेश जारी करते हुए तत्काल प्रभाव से इन नियुक्तियों को रद्द किया है। इन नियुक्तियों को राजनीतिक लाभ के लिए की गई सिफारशें मानते हुए रद्द किया गया है।

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दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता (फाइल फोटो)

Photo : ANI

Delhi News: दिल्ली में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए पूर्व की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार में हुई कुल 177 मनोनीत नियुक्तियों को रद्द कर दिया है। सरकार ने आदेश जारी कर इन नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इनमें से ज्यादातर राजनीतिक नियुक्तियां थीं, जिनमें AAP के मौजूदा विधायक, पूर्व विधायक और पार्टी पदाधिकारी शामिल थे।

दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाले विभिन्न बोर्डों, समितियों और अकादमियों जैसे दिल्ली जल बोर्ड, पशु कल्याण बोर्ड, दिल्ली हज समिति, तीर्थ यात्रा विकास समिति, हिंदी अकादमी, उर्दू अकादमी, पंजाबी अकादमी, संस्कृत अकादमी, साहित्य कला परिषद आदि में ये नियुक्तियां की गई थीं।

इस वजह से अमान्य हुईं नियुक्तियां

भाजपा सरकार के आदेश के अनुसार, इन नियुक्तियों को “राजनीतिक लाभ के लिए की गई सिफारिशें” मानते हुए अमान्य किया गया है। दिल्ली सरकार के सूत्रों का कहना है कि पिछली सरकार ने इन संस्थाओं में अपने नेताओं और नज़दीकी लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पदों पर बैठाया था, जो कि नियमों और पारदर्शिता के खिलाफ था।

गौरतलब है कि पिछली आम आदमी पार्टी सरकार ने अपने कार्यकाल में कई प्रमुख नेताओं को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया था। उदाहरण के तौर पर, आप विधायक पवन राणा को दिल्ली जल बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था, जबकि विधायक विनय मिश्रा वाइस चेयरमैन थे। पूर्व मंत्री जितेंद्र तोमर की पत्नी प्रीति तोमर को भी इसी बोर्ड में सदस्य के रूप में नामित किया गया था।

इसी तरह, हज कमेटी में पूर्व आप विधायक अब्दुल रहमान और हाजी यूनुस सदस्य थे। पंजाबी अकादमी में जरनैल सिंह को वाइस चेयरमैन बनाया गया था। दिल्ली एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड का अध्यक्ष पद गोपाल राय को सौंपा गया था, वहीं सदस्य के रूप में आदिल अहमद खान और पूर्व विधायक अजेश यादव की नियुक्ति हुई थी।

यह फैसला जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा

नई सरकार का कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए ऐसे राजनीतिक हस्तक्षेपों को समाप्त करना आवश्यक था। यह फैसला राजनीतिक नियुक्तियों के खिलाफ सरकार की “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति का हिस्सा बताया जा रहा है।

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bhawana gupta
भावना किशोरauthor

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मूल की भावना ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIMC से 2014 में पत्रकारिता की पढ़ाई की. 12 सालों से मीडिया में काम कर रही हैं. न्यूज़ नेशन, इंडिया न्यूज़, टीवी 9 भारतवर्ष और ज़ी न्यूज़, न्यूज 18 में काम करने का अनुभव. अभी Times Now में Special correspondent हैं.दिल्ली सरकार, स्वास्थ्य ,रेल, कल्चरल, शिक्षा मंत्रालयों के साथ दिल्ली क्राइम ,पॉलिटिक्स और राजधानी की हर छोटी बड़ी खबरों पर खास तौर से नजर रखती हैं. लोगों से जुड़ी खबरों पर काम करने और लोगों तक सही और सटीक खबरें पहुंचाने को अपना मकसद मानती हैं।

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