Delhi Crime News: दिल्ली की एक अदालत ने अपनी बेटी के साथ 10 साल तक मारपीट, उसकी लज्जा भंग और शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना के आरोपी पिता को बरी कर दिया है। अदालत ने यह फैसला इसलिए सुनाया क्योंकि ट्रायल के दौरान बेटी ने ही अपने सारे आरोपों से इनकार कर दिया। मामला लाहौरी गेट थाने का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार बेटी ने आरोप लगाया था कि उसका पिता करीब 10 साल से उसे पीट रहा है, गाली-गलौज करता है और उसकी पढ़ाई और इलाज की जरूरतों को पूरा नहीं करता है।
पहले बेटी ने लगाया था शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना का आरोप
बेटी का आरोप था कि 31 मार्च 2024 को पिता ने उसे पीटा और पेट में लात मारी, जिसके बाद केस दर्ज हुआ था। इस मामले में आरोपी अबाद पर भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 509 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत केस चल रहा था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विकास गर्ग ने 15 अक्टूबर को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान बेटी ने कहा कि उसने कभी भी अपने पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराई और पिता ने उसे कभी नहीं पीटा। बेटी ने अदालत में कहा कि मजिस्ट्रेट के सामने उसने जो बयान दिया था, वह उसके मामा और पुलिस अधिकारियों के दबाव में दिया था।
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कोर्ट में बेटी ने घटना से किया इनकार
अदालत ने नोट किया कि अभियोजन पक्ष की ओर से जिरह के दौरान भी बेटी ने कथित घटना से इनकार किया और अपने पिता के खिलाफ लगे आरोपों का समर्थन नहीं किया। इस केस में दो अन्य गवाह भी आरोप साबित नहीं कर सके। एक गवाह ने कहा कि उसने आरोपी को अपनी पत्नी और बेटी को पीटते देखा, लेकिन उसके बयानों में विरोधाभास था। वहीं दूसरा गवाह बेटी का मामा था। मामा ने कोर्ट में बताया कि कथित मारपीट उसकी मौजूदगी में नहीं हुई थी।
कोर्ट ने पिता को किया बरी
इन सभी बातों को देखते हुए अदालत ने कहा कि पीड़िता की गवाही अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं करती है, जबकि अन्य गवाहों के सबूत केस में खामियों को भरने के लिए अपर्याप्त हैं। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे आरोपों को साबित करने में विफल रहा है। इसलिए आरोपी अबाद को संदेह का लाभ दिया जाता है और सभी आरोपों से बरी किया जाता है।
