आम आदमी पार्टी (AAP) ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR - Special Intensive Revision) प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि चुनाव आयोग के 99% से अधिक फॉर्म वितरण के दावों के विपरीत, दिल्ली के गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में लगभग 50 प्रतिशत निवासियों को अब तक गणना फॉर्म मिले ही नहीं हैं। पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जब लोगों को फॉर्म ही नहीं मिलेंगे, तो वे उन्हें भरकर कैसे लौटाएंगे? उन्होंने आरोप लगाया कि BLO पॉश इलाकों और डीडीए फ्लैटों में तो घर-घर जा रहे हैं, लेकिन दिल्ली की 70% आबादी वाले गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में फॉर्म नहीं बांटे जा रहे हैं।
बूथों पर सिर्फ 30-35% फॉर्म जमा, जबरन काटे जा रहे नाम
बुराड़ी से आप विधायक संजीव झा ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के बूथ नंबर 64 में 1,670 पंजीकृत मतदाताओं में से केवल 510 फॉर्म जमा हुए हैं। इसी तरह बूथ नंबर 158 पर 1,460 में से 427 और बूथ 160 पर 1,041 में से मात्र 280 फॉर्म ही जमा किए गए हैं।
बुराड़ी विधायक हर पोलिंग बूथ पर केवल 30 से 35 प्रतिशत फॉर्म ही जमा हो पाए हैं। जब बीएलओ से पूछा जाता है, तो वे कहते हैं कि उन्हें बाकी सभी लोगों को 'शिफ्टेड' मार्क करने का निर्देश मिला है, जिसका सीधा मतलब है कि उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए जाएंगे।
संजीव झा ने यह भी आरोप लगाया कि जून की छुट्टियों में की गई प्री-SIR प्रक्रिया के दौरान पहले ही 13 से 14 लाख वोट काटे जा चुके हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से SIR प्रक्रिया की समय सीमा बढ़ाने और काटे गए वोटों को बहाल करने की अपील की।
किरायेदारों और प्रवासियों के वोट कटने का खतरा
आप के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक ने कहा कि दिल्ली में यूपी, बिहार, हरियाणा और पंजाब से आए 60-70% लोग किराये के मकानों में रहते हैं और अक्सर मकान बदलते हैं। इस वजह से उनके नाम वोटर लिस्ट से कटने का सबसे बड़ा जोखिम है।
दुर्गेश पाठक ने कहा कि दिल्ली की स्थिति अन्य राज्यों से अलग है, जहां ग्रामीण आबादी ज्यादा है। इसलिए चुनाव आयोग को दिल्ली के लिए विशेष दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों पर प्रक्रिया को जल्दबाजी में पूरा करने और बड़े पैमाने पर हेरफेर करने का दबाव बनाया जा रहा है। AAP ने चुनाव आयोग से मांग की है कि वह संवेदनशील रुख अपनाते हुए प्रक्रिया में तुरंत सुधार करे।
