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दालमंडी में सड़क चौड़ीकरण ने पकड़ी रफ्तार, अब सालों पुरानी मस्जिदों पर होगा बुलडोजर एक्शन

वाराणसी के दालमंडी इलाके में सड़क चौड़ीकरण परियोजना को लेकर ध्वस्तीकरण अभियान तेज हो गया है। प्रशासन ने 31 मई तक सभी चिन्हित भवनों और प्रभावित संपत्तियों को खाली कराने का लक्ष्य तय किया है। अब इस कार्रवाई की जद में छह पुरानी मस्जिदें भी आ गई हैं, जिनके विस्थापन को लेकर मस्जिद कमेटियों और प्रशासन के बीच लगातार बातचीत जारी है।

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दालमंडी सड़क चौड़ीकरण परियोजना (प्रतिकात्मक फोटो)

Photo : PTI

Dalmandi News: वाराणसी के दालमंडी में सड़क चौड़ीकरण के लिए तेजी से ध्वस्तीकरण का काम चल रहा है। कहीं हथौड़ा चल रहा है तो कहीं बुलडोजर गरज रहा है। ध्वस्तीकरण पूरा करने ने के लिए जिला प्रशासन ने 31 मई तक की तारीख तय की गई है। दालमंडी में अभी तक भवनों पर ही कार्रवाई हो रही थी लेकिन अब मस्जिदों की बारी है। सड़क चौड़ीकरण की जद में ने वाली छह प्रमुख मस्जिदों पर किसी भी वक्त बुलडोजर की कार्रवाई हो सकती है। ध्वस्तीकरण का मसौदा क्या होगा, इसके लिए मस्जिद कमेटियों और जिला प्रशासन के बीच बातचीत जारी है। जिन छह मस्जिदों पर बुलडोजर की कार्रवाई होने जा रही है, उसमें 200 साल से अधिक पुरानी लंगड़ा हाफिज मस्जिद भी शामिल है।

ये हैं मस्जिदों के नाम

  • करीमुल्ला बेग मस्जिद (चौक छोर पर,226 साल पुरानी)
  • संगमरमर वाली मस्जिद
  • निसारन मस्जिद
  • अली रजा मस्जिद
  • रंगीले शाह मस्जिद
  • लंगड़ा हाफिज मस्जिद (200 साल से अधिक पुरानी)

अंतिम चरण में है काम

दालमंडी में चौड़ीकरण की परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। शुक्रवार को सात जर्जर भवनों पर हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के साथ ही अब तक 107 प्रॉपर्टी खाली करा ली गई है। बची हुई 80 प्रॉपर्टी 31 मई तक खाली करा ली जाएगी इनमें छह मस्जिद भी शामिल है। दालमंडी प्रोजेक्ट की कार्यदायी संस्था पीडब्लूडी के एक्सईएन केके सिंह ने ट बताया कि सभी छह मस्जिद के मुतव्वली और कमेटी से बातचीत चल रही है। अगले तीन से चार दिन में हम मस्जिदों के विस्थापन पर फैसला ले लेंगे।

"हम डेवलपमेंट के खिलाफ नहीं है"

इसको लेकर करीमुल्लाह बेग मस्जिद में बनी मजार के मुजावर बाबू जान ने बताया कि सभी छह मस्जिदों के मुतवल्ली और कमेटी से जुड़े लोग आपस में तय कर के ही कोई फैसला करेंगे। हम डेवलपमेंट के खिलाफ नहीं है। लेकिन जो भी हो वो कानून के दायरे में हो और सबकी सहमति का भी ख्याल रखा जाए। कितनी जगह उनको चाहिए और बचे हुए जगह में हम इबादत कर सकते हैं या नहीं ये सब आपसी बातचीत के बाद ही तय हो पाएगा।

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