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UP News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग से लैस होगी उत्तर प्रदेस में चकबंदी की प्रक्रिया

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Nov 29, 2023, 04:59 PM IST

UP News: उत्तर प्रदेश में अब चकबंदी के प्रक्रिया आसान करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का प्रयोग किया जाएगा। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक सॉफ्टवेयर का निर्माण किया जा रहा है।

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यूपी में चकबंदी की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेस और मशीन लर्निंग का किया जाएगा उपयोग

UP News: उत्तर प्रदेश में अब चकबंदी प्रक्रियाओं आसान हो जाएगी। चकबंदी की इस प्रक्रिया को सरल, सुलभ और अत्याधुनिक बनाने की दिशा में योगी सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसमें न केवल चकबंदी की प्रक्रिया बल्कि भूमि समेकन की प्रक्रिया जैसी अन्य कई प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है। जानकारी के अनुसार ये सभी प्रक्रिया मशीन लर्निंग युक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वाले सॉफ्टवेयर के जरिए अमल में लाने की तैयारी कर ली है

नेक्सट जनरेशन टेक्नोलॉजी से लैस होगा सॉफ्टवेयर

इस कड़ी में यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा एआई बेस्ड एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग सॉफ्टवेयर के निर्माण व क्रियान्वयन की प्रक्रिया जारी कर दी गई है। इस खास सॉफ्टवेयर के डिजाइन, निर्माण, विकास व क्रियान्वयन के लिए टेक्निकल सर्विस प्रोवाइडिंग (टीएसपी) एजेंसी की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही ई-टेंडर के जरिए आवेदन को आमंत्रित किया जा रहा है।

आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, टेक्निकल सर्विस प्रोवाइडिंग एजेंसी द्वारा चकबंदी से जुड़ी प्रक्रियाओं के आसान बनाने के लिए एक सॉफ्टवेयर का निर्माण किया जा रहा है। ये सॉफ्टवेयर सैटेलाइट इमेज एक्सेस, रोवर सर्वे, डीजीपीएस, नाविक, ब्लॉकचेन डाटा एक्सेस जैसी नेकस्ट जेनरेशन टेक्नॉलोजी से लैस होगा। इसके लागू होने से चकबंदी प्रक्रिया के ऑटोमेशन, डिजिटाइजेशन तथा डिस्प्यूट रेसोलुशन समेत तमाम कार्यों की पूर्ति एरर फ्री और सरल तरीके से की जाएगी।

कम समय में होगा भूमि का समेकन

देखा जाए तो अभी के समय में किसी भी गांव में भूमि समेकन की प्रक्रिया पूरी करने में 100 से 1300 दिन लग जाते हैं, लेकिन इस सॉफ्टवेयर के अमल में आने के बाद इस प्रक्रिया को मैप व डिजिटाइज्ड रिकॉर्ड्स के माध्यम से कम से कम समय में पूरा किया जा सकेगा। इसी प्रकार से चक के विनिमय अनुपात गणना, विनिमय दर पैरामीटर मूल्यांकन और वेक्टर मैप पर नक्काशी जैसी प्रक्रिया आसानी से पूरी का सकेगी।

जानकारी के अनुसार कार्य को आसान करने के लिए सॉफ्टवेयर का निर्माण किया जा रहा है। ये सैटेलाइट इमेजिंग बेस्ड होगा तथा इससे रोवर सर्वे को मैनुअली करने के बजाए डाटा इवैल्युएशन के जरिए बेहद कम समय में सटीकता के साथ पूर्ण किया जा सकेगा। यह चकबंदी एक्ट्स का एनालिसिस करके एल्गोरिदम बनाने में भी सक्षम होगा तथा खतौनी को ब्लॉकचेन बेस्ड सिस्टम पर ले जाने में सक्षम होगा।

चकबंदी आयुक्त ने इस सॉफ्टवेयर के संबंध में बात कर जानकारी देते हुए बताया कि इसमें फाइनलाइज्ड खसरा, खतौनी व मैप्स को चकबंदी के जीआईएस बेस्ड पोर्टल पर डिजिटाइजेशन प्रक्रिया के जरिए अपलोड किया जा सकेगा, जो कि काफी आसान हो सकता है।

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