Hanuman Beniwal: राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष मदन राठौड़ ने गुरुवार को आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा "अशोभनीय" है और यह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। जानकारी के अनुसार, बुधवार रात जयपुर के पास भैराणा धाम में औद्योगिक प्रयोजन के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में एक प्रदर्शन रैली आयोजित की गई थी। इसी दौरान हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को "मूर्खाधिराज" (मूर्खों का नेता) कहकर संबोधित किया, जिस पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
"टीआरपी" बढ़ाने के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल
राठौड़ ने आरोप लगाया कि कुछ नेता सुर्खियों में बने रहने और अपनी "टीआरपी" (Television Rating Point) बढ़ाने के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध स्वाभाविक है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में शब्दों की मर्यादा और शालीनता बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि राजनीति में शुद्धता की आवश्यकता है और इस तरह की भाषा जनता के नेताओं पर भरोसे को कमजोर कर सकती है।
संयम और मर्यादा बनाए रखने की अपील
राजस्थान के पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को सार्वजनिक जीवन की गरिमा बनाए रखनी चाहिए और राजनीतिक चर्चा को व्यक्तिगत टिप्पणियों के बजाय मुद्दों और तथ्यों पर केंद्रित होना चाहिए। वहीं, राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने हनुमान बेनीवाल द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ की गई अभद्र भाषा को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए नुकसानदायक है। इसके अलावा, भाजपा के कई अन्य नेताओं जिनमें प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच तथा पार्टी के महासचिव श्रवण सिंह बगड़ी और भूपेंद्र सैनी शामिल हैं, ने भी राजनीतिक संवाद में संयम और मर्यादा बनाए रखने की अपील की है।
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा ये
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि हनुमान बेनीवाल का बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री के प्रति आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया है। उन्होंने कहा कि एक सांसद होने के नाते बेनीवाल को संसदीय परंपराओं और सार्वजनिक जीवन की गरिमा का पालन करना चाहिए। बेढम ने आगे कहा कि जनता इस प्रकार की भाषा को स्वीकार नहीं करेगी और राजनीतिक संवाद में संयम बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि बयान सुनकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे वे नशे की अवस्था में बोल रहे हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है।
