बिलासपुर का वह ऐतिहासिक भवन, जिसने अपने अंदर कई इतिहास को समेटा हुआ है। साथ ही इस भवन से छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की शुरुआत की की गई थी। स्कूल के बाद इस भवन को न्याय के मंदिर के रूप में पहचान मिली। फिर विश्वविद्यालय और अब उत्कृष्ठ महाविद्यालय के रूप में नई पहचान बनाने जा रही है।
इतिहास गवाह है इस भवन की भव्यता और विरासत की कहानी दूर दूर तक फैली हुई है। इसी भवन से प्रदेश का सबसे पहला स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम का महाविद्यालय तैयार किया गया था। साथ ही सबसे पुरानी इमारत होने की इसकी विशेषता भी अपने आप में खास है।
इस साल हुई थी स्थापना
आपको बता दें कि इसकी स्थापना साल 1932 में की गई थी। यह 92 वर्षों की एक ऐसी चमकदार विरासत है, जिसने शहर को बड़ी पहचान दी है। वहीं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्रामीण भारत के विचारों को आत्मसात करते हुए इसका नाम पहले बुनियादी प्रशिक्षण संस्था पड़ा था। यहां बच्चों को पढ़ाना और साथ ही कढ़ाई, चाक मिट्टी, टाटपट्टी आदि बनाना भी सिखाया जाता था।
क्या था मिशन?
इसका मिशन था कि पढ़ाई के साथ स्वरोजगार के साधनों की दिशा में बढ़ा जाए और पढ़ाई के साथी ही इन सभी कामों को भी सीख लिया जाए। यह एक ऐसा स्कूल था, जो शुरुआत से ही बच्चों में आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रहा था। बच्चे यही पढ़ते थे और यहीं रहते थे।
