मध्यप्रदेश कांग्रेस ने अपने संगठन में ओबीसी वर्ग को सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया है, जिसमें 39 फीसद यानी 28 जिलों में ओबीसी नेताओं को अध्यक्ष बनाया गया है। इसके बाद सामान्य वर्ग के नेताओं को 35 प्रतिशत (24 जिलों) में जिम्मेदारी दी गई है, जबकि अनुसूचित जनजाति वर्ग को 14 फीसद (10 जिलों) में अध्यक्षता मिली है।
हालांकि, ओबीसी के 39% अध्यक्षों में से कई दिग्गज नेताओं जैसे प्रियव्रत सिंह, जयवर्धन सिंह और ओमकार सिंह मरकाम को जिलाध्यक्ष बनाया गया, लेकिन इन जिलों के कार्यकर्ताओं में कोई खास उत्साह नहीं दिखा। कार्यकर्ताओं में नाराजगी का माहौल है, खासकर जब राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के सीनियर नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया गया।
कार्यकर्ता अपने नए जिलाध्यक्षों को समझाने में लगे हुए हैं। सामान्य वर्ग के 34 फीसद जिला अध्यक्ष 25 जिलों में बनाए गए हैं, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग के 11 फीसद अध्यक्ष 8 जिलों में नियुक्त किए गए हैं। इस संगठनात्मक बदलाव के बावजूद, कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया ने कांग्रेस के भीतर असंतोष को उजागर किया है, जो पार्टी के लिए एक चुनौती बन सकता है।
