भोपाल

मध्य प्रदेश के बच्चों का खुला भाग्य! 21 हजार छात्रों को मिलेंगे लैपटॉप; 7500 मेधावियों को मिली स्कूटी

मध्य प्रदेश के 21 हजार मेधावी बच्चों को लैपटॉप वितरित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त सरकारी स्कूलों के 7,500 बच्चों को स्कूटी दी गई है।

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मध्य प्रदेश लैपटॉप योजना

भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य के प्रतिभाशाली 21,000 बच्चों को लैपटॉप देने का ऐलान किया है। राज्य के प्रतिभाशाली बच्चों को मुख्यमंत्री ने बुधवार को स्कूटी की चाबी सौंपी। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के 7,500 बच्चों को स्कूटी दी गई है और 21,000 बच्चों को लैपटॉप दिए जाएंगे। बच्चे कोई भी हों, आगे बढ़ें, खासकर सरकारी स्कूल के बच्चों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। इस बात का मुझे संतोष है कि इन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है।

स्कूटी पाकर खुश हुए मेधावी

सरकार की स्कूटी योजना के तहत मिली स्कूटी से प्रतिभाशाली छात्र प्रसन्न हैं। सीएम राइज स्कूल की छात्रा सायना का कहना है कि मुझे इस बात की खुशी है कि स्कूटी मिली और उसके बाद मेरी स्कूटी पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सवारी की। इस स्कूटी के मिलने से कहीं भी जाने में मदद मिलेगी और बस आदि का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। समय की बचत होगी।

आशीष साहू का कहना है कि स्कूटी हमारे लिए मददगार होगी। स्कूटी के मिलने से समय की बचत होगी और पढ़ाई के लिए ज्यादा समय मिल सकेगा। सलोनी विश्वकर्मा भी स्कूटी मिलने से खुश थीं और उसका कहना है कि स्कूटी मिलने से काॅलेज आने-जाने में होने वाली परेशानी से बचा जा सकेगा।

कुमकुम पाटीदार का कहना है कि उन्‍हें तो लगने लगा था कि यह उपहार नहीं मिलेगा। लेक‍िन अब वह स्कूटी पाकर खुश हैं। सरकार ने लैपटॉप देने की बात कही है, उसका इंतजार रहेगा। राजेंद्र लोधी का कहना है कि स्कूटी उनके जीवन को और आसान बनाने में मददगार होगी।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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