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12–18 महीने से SIP में निवेश के बाद भी रिटर्न जीरो? आपसे कहां हो रही है गलती

अगर आपने भी SIP में निवेश किया है और बीते एक साल से नेगटिव रिटर्न की मार झेल रहे हैं तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय लोग कुछ गलतियां कर बैठते हैं जिसका हर्जाना उन्हें लॉन्ग टर्म में भुगतना पड़ता है, आइए जानते हैं आप ऐसी क्या गलती कर रहे हैं?

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Mutual Fund

म्यूचुअल फंड में निवेश इन दिनों तेजी से बढ़ रहा है और लाखों लोग SIP के जरिए हर महीने पैसा लगाकर अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग मजबूत कर रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों में बाजार की अस्थिरता के कारण कई निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं मिल रहा। कुछ लोगों का SIP पोर्टफोलियो तो पिछले 1 साल से लगभग फ्लैट है या निगेटिव भी जा चुका है। ऐसे में कई निवेशक परेशान हैं और सोच रहे हैं कि क्या SIP बंद कर दें या फंड बदल लें। अगर आपने भी किसी SIP में पैसा लगाया है और बीते एक साल से नेगेटिव रिटर्न की मार झेल रहे हैं तो आइए बताते हैं आखिर आप कौन सी गलती कर रहे हैं?

आजकल बहुत से लोग म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए पैसा लगा रहे हैं, लेकिन पिछले 12–15 महीनों में कई निवेशकों को रिटर्न न के बराबर मिला है। कुछ लोगों का पोर्टफोलियो तो निगेटिव भी चला गया है। इसलिए सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि क्या SIP बंद कर दें या फंड बदल लें?

क्यों गिर रहा है पोर्टफोलियो?

असल में पिछले एक साल से शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। सितंबर 2024 के बाद से ग्लोबल ट्रेड वॉर, टैरिफ इश्यू और जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण मार्केट लगातार अनिश्चित रहा है। इसी का असर म्यूचुअल फंड रिटर्न पर भी पड़ा है। कई बड़ी फंड कैटेगरी इस दौरान निगेटिव या फ्लैट रिटर्न दे रही हैं। लेकिन यह सिर्फ शॉर्ट-टर्म का फेज है।

जब इन ही फंडों के 3-5 साल के रिटर्न देखे गए तो तस्वीर बिल्कुल अलग निकली। मान लीजिए, Tata Small Cap Fund ने 1 साल में -4% रिटर्न दिया है, लेकिन 5 साल में इसने लगभग 31% सालाना रिटर्न दिया है। कई दूसरे फंड भी हैं जिन्होंने कम अवधि में खराब प्रदर्शन किया, पर लंबी अवधि में शानदार रिटर्न बनाए हैं। इसलिए SIP में निवेश करने का असली फायदा तभी मिलता है, जब आप लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं।

क्या करें जब SIP का रिटर्न घट जाए?

सबसे पहले बाजार गिरने से घबराकर निवेश बंद न करें। SIP का फायदा ही यही है कि मार्केट गिरने पर आपको ज्यादा यूनिट मिलती हैं, जो आगे जाकर अच्छा रिटर्न देती हैं। बिना रिसर्च किए सिर्फ डर में फंड बदलना या पैसा निकालना गलत फैसला हो सकता है। हर कदम से पहले अपने फंड की कैटेगरी के बेस्ट फंड्स से तुलना करें। अगर फर्क बहुत ज्यादा है तभी एक्सपर्ट से सलाह लेकर स्विच करें।

इसके अलावा, अपने जोखिम क्षमता का सही आंकलन करें। अगर आप हाई रिस्क सह सकते हैं तो इक्विटी फंड सही हैं, लेकिन अगर आप मध्यम जोखिम वाले निवेशक हैं तो हाइब्रिड फंड, डेट फंड या सरकारी योजनाओं से बैलेंस बनाना जरूरी है।

SIP Pause करने से बचें

कई लोग मार्केट गिरने पर SIP रोक देते हैं और सोचते हैं कि बाजार सुधरेगा तो फिर शुरू करेंगे। यह गलत रणनीति है, क्योंकि गिरते बाजार में ही आपको सबसे ज्यादा यूनिट मिलती हैं। इससे आगे चलकर आपका रिटर्न बढ़ता है।

डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाएं

निवेश में डाइवर्सिफिकेशन बहुत जरूरी है। अलग-अलग कैटेगरी के फंड रखें, जैसे मल्टी-कैप, फ्लेक्सी-कैप आदि। लेकिन बहुत ज्यादा फंड भी न रखें, वरना निवेश बिखर जाता है। 6–8 अच्छी फंड स्कीम पर्याप्त होती हैं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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