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बाजार की गिरावट में भी नहीं डूबेगा आपका पैसा! जानें सोने-चांदी के निवेश को 'क्रैश-प्रूफ' बनाने के 5 मास्टर टिप्स

Gold-Silver Investment: अगर आप भी बाजार की गिरावट और सोने-चांदी की गिरती कीमतों से परेशान हैं तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है, क्योंकि आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आप कैसे बाजार की गिरावट में भी अपने निवेश को क्रैश प्रूफ बना सकते हैं?

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Gold Silver

Gold-Silver Investment: शेयर बाजार की उठा-पटक और ग्लोबल अनसर्टेनिटी के बीच, सोना और चांदी हमेशा से निवेशकों के लिए 'सुरक्षित ठिकाना' (Safe Haven) रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ समय में कीमती धातुओं की कीमतों में भी काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे में कई निवेशक डर जाते हैं कि क्या उनका निवेश डूब जाएगा? एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने-चांदी में निवेश करना केवल गहने खरीदना नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी रणनीति होनी चाहिए। अगर आप अगले 10 सालों के लिए वेल्थ बनाना चाहते हैं, तो आपको अपने निवेश को 'क्रैश-प्रूफ' बनाना होगा, ताकि बाजार गिरे या संभले, आपका मुनाफा सुनिश्चित रहे।

ऐसे में आइए आज हम आपको 10 ऐसे तरीके बताने जा रहे हैं जिससे बाजार गिरे या टूटे आपकी कमाई पर नहीं डूबेगी। इन तरीकों को अपनाकर आप अपनी मेहनत की कमाई को और बढ़ा सकते हैं.

इन 5 तरीकों से सुरक्षित रहेगा आपका सोना-चांदी

1. एसेट एलोकेशन का सही गणित

सोने-चांदी में निवेश का सबसे पहला नियम है संतुलन। कभी भी अपना सारा पैसा केवल सोने या चांदी में न लगाएं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, आपके कुल इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो का 10% से 15% हिस्सा ही कीमती धातुओं में होना चाहिए। यह हिस्सा बाजार में आने वाले बड़े क्रैश के दौरान एक 'सुरक्षा कवच' की तरह काम करता है। जब शेयर बाजार नीचे जाता है, तो अक्सर सोने की कीमतें बढ़ने लगती हैं, जिससे आपका कुल नुकसान कवर हो जाता है।

2. सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) का जादू

कीमतें कम होने का इंतजार करने के बजाय, निवेश का सबसे बेहतर तरीका 'गोल्ड एसआईपी' है। बाजार में उतार-चढ़ाव के समय एक साथ बड़ा पैसा लगाने में रिस्क होता है। इसकी जगह, हर महीने एक निश्चित राशि डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ (ETF) या म्यूचुअल फंड में लगाएं। इससे आपको 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' का फायदा मिलता है। यानी जब कीमतें कम होंगी तो आपको ज्यादा यूनिट्स मिलेंगी और जब कीमतें ज्यादा होंगी तो आपके निवेश की वैल्यू बढ़ेगी। यह तरीका आपके निवेश को कीमतों के झटकों से पूरी तरह बचा लेता है।

3. फिजिकल गोल्ड की जगह डिजिटल और पेपर गोल्ड

अगर आप निवेश के मकसद से सोना खरीद रहे हैं, तो फिजिकल गोल्ड (गहने या सिक्के) से बचना चाहिए। गहनों में मेकिंग चार्ज और शुद्धता की समस्या होती है, जो आपके रिटर्न को 10-15% तक कम कर देती है। इसकी जगह Sovereign Gold Bonds (SGB) या Gold ETFs चुनें। सोवेरेन गोल्ड बॉन्ड पर सरकार आपको सालाना 2.5% ब्याज भी देती है और मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन टैक्स भी नहीं लगता। यह आपके निवेश को न केवल सुरक्षित बनाता है बल्कि उसे एक्स्ट्रा 'प्रॉफिटेबल' भी बनाता है।

4. चांदी में निवेश

चांदी केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि एक औद्योगिक धातु भी है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी का भारी इस्तेमाल होता है। इसलिए, चांदी में निवेश करते समय वैश्विक औद्योगिक विकास पर नजर रखना जरूरी है। चांदी सोने की तुलना में ज्यादा अस्थिर (Volatile) होती है, इसलिए इसमें निवेश हमेशा लंबी अवधि (5 से 10 साल) के लिए ही करना चाहिए। गिरावट के समय घबराकर बेचने के बजाय इसे 'बाय ऑन डिप्स' (गिरावट पर खरीदें) की रणनीति के साथ जोड़ना चाहिए।

5. लॉन्ग टर्म विजन और डिसिप्लिन

किसी भी निवेश को क्रैश-प्रूफ बनाने का सबसे बड़ा हथियार है समय। सोने और चांदी ने ऐतिहासिक रूप से लंबी अवधि में हमेशा मुद्रास्फीति (Inflation) को मात दी है। अगर आप 1-2 साल के मुनाफे के लिए निवेश कर रहे हैं, तो बाजार का उतार-चढ़ाव आपको डरा सकता है। लेकिन अगर आपका लक्ष्य 10 साल का है, तो छोटी-मोटी गिरावट आपके लिए खरीदारी का मौका होनी चाहिए। अनुशासन के साथ निवेश करते रहें और अपनी होल्डिंग्स को बार-बार न बेचें।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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