Gold Price: सोने की कीमतों में जिस तरह से बढ़ोतरी हो रही है, उससे लगता है कि 24 कैरेट के 10 ग्राम सोने की कीमत जल्द 1 लाख रुपये पर पहुंच जाएगी। लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए सोने की कीमतों में अभी भी 14,000 रुपये या 16% की वृद्धि होनी चाहिए। मंगलवार को सोने ने 86,360 रुपये के ऑल टाइम हाई लेवल को छुआ और 85,532 रुपये पर बंद हुआ। पिछले साल से सोने में तेजी 2025 में भी जारी है, सोने की कीमतों में डेढ़ महीने से भी कम समय में 8600 रुपये प्रति 10 ग्राम या 11% से अधिक की वृद्धि हुई है।
Gold Price: क्या 1 लाख रुपये होगी सोने की कीमत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई। क्या सोने की कीमत अगले कुछ महीनों में 1 लाख रुपये के मील के पत्थर को छूने के लिए तेजी से आगे बढ़ सकती है? यहां एक्सपर्ट्स का क्या कहना है कि 1 लाख रुपये के स्तर तक पहुंचने के लिए सोने की कीमतों में अभी भी 14,000 रुपये या 16% की बढ़ोतरी होनी चाहिए। मंगलवार को सोने ने 86,360 रुपये का सर्वकालिक उच्च स्तर छुआ और सत्र के अंत में 85,532 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि इस बात पर आम सहमति है कि टैरिफ बढ़ने की वजह से सोने की कीमतें अगले कुछ महीनों तक बढ़ सकती हैं, लेकिन कई एक्सपर्ट्स को 1 लाख रुपये के लक्ष्य को छूने की संभावना नहीं दिख रही है।
Gold Price: सोने के 1 लाख होने को लेकर एक्सपर्ट के विचार
इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स के डायरेक्टर कमोडिटीज और करेंसी नवीन माथुर ने कहा कि हालांकि सोना नई ऊंचाई प्राप्त कर सकता है, लेकिन अगले कुछ महीनों में 1 लाख रुपये तक पहुंचना असंभव लगता है। उन्होंने कहा कि 2024 में सोने की कीमतों में 27% और 2025 में अब तक 11% की उछाल मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंक की खरीदारी और आक्रामक दर कटौती की उम्मीदों से प्रेरित है। माथुर ने कहा कि इस साल की तेजी को ट्रम्प की टैरिफ अनिश्चितता ने बढ़ावा दिया है, जिससे हाजिर सोना 2,942.68 डॉलर प्रति औंस के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जबकि MCX गोल्ड फ्यूचर्स के लिए 86,360 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
माथुर ने कहा कि अगर टैरिफ बढ़ता है, तो वे वैश्विक विकास को धीमा कर सकते हैं और सोने की मांग बढ़ा सकते हैं। हालांकि, ट्रंप की महंगाई दर समर्थक नीतियां फेड के मौद्रिक रुख को आक्रामक बनाए रख सकती हैं, जिससे दरों में आक्रामक कटौती को रोका जा सकता है। इससे सोने की तेजी पर रोक लग सकती है और बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटी एवं करेंसी प्रमुख अनुज गुप्ता ने इस दृष्टिकोण से सहमति जताते हुए कहा कि दिवाली तक उनका लक्ष्य 87,000 रुपये पर बरकरार है, क्योंकि उन्होंने जादुई स्तर की संभावना से इनकार किया। ऐतिहासिक रूप से सोने को युद्ध, आर्थिक मंदी और महंगाई जैसी वैश्विक अनिश्चितताओं के खिलाफ बचाव के रूप में देखा जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा स्टील और एल्युमीनियम आयात पर टैरिफ को बिना किसी अपवाद या छूट के 25% तक बढ़ाने के बाद मंगलवार को भारतीय बाजारों में भारी गिरावट आई, जिससे कई मोर्चों पर व्यापार युद्ध का खतरा बढ़ गया।
