बिजनेस

₹1 लाख करोड़ स्वाह! रिकॉर्ड हाई से 8% क्यों गिरे रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर, क्या खरीदने का सही मौका?

Reliance Industries Share Price Crashed: देश की सबसे मुल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में मंगलवार को 5 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है। इससे एक दिन पहले ही RIL के शेयर ने रिकॉर्ड हाई हिट किया था। रिकॉर्ड हाई से शेयरों की कीमत में करीब 8 फीसदी की कमी आई है। इससे निवेशकों को करीब 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। क्या यह गिरावट खरीदारी का मौका है, जानिए क्या है एक्सपर्ट की राय?

Image

रिलायंस का शेयर धड़ाम। (इमेज क्रेडिट, ओपन एआई)

Reliance Industries Limited के शेयरों में मंगलवार को तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सोमवार को ₹1,611.80 का रिकॉर्ड हाई छूने के बाद RIL का शेयर मंगलवार को एक ही सत्र में करीब 5% तक टूट गया। वहीं, रिकॉर्ड हाई से मंगलवार को इंट्राडे में ₹1,496.30 के लो तक फिसल गया। इस तरह रिकॉर्ड हाई से शेयर 7.72% तक फिसल गया। भारी वॉल्यूम के साथ आई इस गिरावट ने बाजार में हलचल मचा दी और यह शेयर बेंचमार्क इंडेक्स पर सबसे बड़ा दबाव बना।

रिलायंस के शेयर में गिरावट क्यों?

गिरावट की सबसे बड़ी वजह रूसी क्रूड को लेकर आई खबर और उस पर कंपनी की सफाई रही। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि रूसी क्रूड से भरे तीन टैंकर गुजरात के जामनगर रिफाइनरी की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि, Reliance Industries ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस रिपोर्ट को “पूरी तरह गलत” बताते हुए खारिज कर दिया। कंपनी ने स्पष्ट किया कि बीते तीन हफ्तों में जामनगर रिफाइनरी को कोई रूसी क्रूड नहीं मिला है और जनवरी 2026 में भी ऐसी कोई डिलीवरी अपेक्षित नहीं है। इस खंडन के बाद निवेशकों में असमंजस बढ़ा और मुनाफावसूली तेज हो गई, जिसका सीधा असर शेयर पर पड़ा।

ट्रंप ने बढ़ाया दबाव

गिरावट के पीछे वैश्विक राजनीति का असर भी दिखा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान से निवेशकों की चिंता बढ़ी, जिसमें उन्होंने भारत की तरफ से रूसी तेल खरीद जारी रखने पर टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी थी। इस बयान ने तेल से जुड़े शेयरों पर दबाव बनाया और रिलायंस भी इसकी चपेट में आ गया।

वेनेजुएला एंगल भी है अहम

लॉन्ग टर्म में रिलायंस के लिए Venezuela Factor अहम बना हुआ है। कंपनी का वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA के साथ लॉन्ग टर्म समझौता रहा है। एनालिस्टों का मानना है कि अगर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील मिलती है या वेनेजुएला से तेल सप्लाई बढ़ती है, तो रिलायंस को ब्रेंट क्रूड के मुकाबले 5–8 डॉलर प्रति बैरल तक सस्ता कच्चा तेल मिल सकता है। इससे कंपनी के ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत हो सकते हैं।

ब्रोकरेज अब भी बुलिश

तेज गिरावट के बावजूद ब्रोकरेज हाउस Reliance पर बुलिश बने हुए हैं। ET Now की रिपोर्ट के मुताबिक Morgan Stanley ने शेयर पर ‘Overweight’ रेटिंग दोहराते हुए ₹1,847 का टारगेट दिया है। UBS ने ₹1,820 और Jefferies ने ₹1,785 का टारगेट बरकरार रखा है। ब्रोकरेज का मानना है कि 2026 में हर तिमाही में कोई न कोई री-रेटिंग ट्रिगर सामने आ सकता है, चाहे वह O2C बिजनेस हो, टेलीकॉम या न्यू एनर्जी सेगमेंट।

फंडामेंटल्स में मजबूती बरकरार

Reliance का जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स दुनिया का सबसे बड़ा और सिंगल-साइट रिफाइनरी कॉप्लेक्स है। इसकी क्षमता 14 लाख बैरल प्रतिदिन है। कंपनी के नतीजे भी मजबूत रहे हैं। Q2 FY26 में ऑपरेशंस से रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 10% बढ़कर ₹2.54 लाख करोड़ पहुंचा, जबकि नेट प्रॉफिट 14% से ज्यादा बढ़कर ₹22,092 करोड़ रहा।

टेक्निकल व्यू: कहां है सपोर्ट

टेक्निकल एनालिस्ट्स के मुताबिक, Reliance जैसे हेवीवेट स्टॉक में तेज गिरावट के बाद सपोर्ट लेवल अहम हो जाते हैं। YES Securities के मार्केट एक्सपर्ट लक्ष्मीकांत शुक्ला के अनुसार, ₹1,540–1,550 का जोन अहम सपोर्ट है। जब तक शेयर इस रेंज के ऊपर बना रहता है, ट्रेंड पॉजिटिव माना जा सकता है। ₹1,600 के ऊपर स्थिर क्लोजिंग मिलने पर ₹1,680–1,700 तक की रिकवरी संभव है।

खरीदारी करें या इंतजार

शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, खासकर ग्लोबल ऑयल सप्लाई और जियोपॉलिटिकल खबरों के चलते। हालांकि, लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह गिरावट आकर्षक एंट्री का मौका बन सकती है, बशर्ते वे चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाएं। एक्सपर्ट्स की राय है कि आंख मूंदकर खरीदारी के बजाय सपोर्ट लेवल और ग्लोबल संकेतों पर नजर रखना जरूरी है। रिकॉर्ड हाई के बाद आई 5% की गिरावट डराने वाली जरूर है, लेकिन Reliance की मजबूत बुनियाद, ब्रोकरेज का भरोसा और संभावित वेनेजुएला क्रूड फायदा इसे लॉन्ग टर्म में फिर से ट्रैक पर ला सकता है।

डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

और पढ़ें
End of Article