Warren Buffett: निवेश जगत में इस खबर से हलचल मची हुई है कि दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट टेक दिग्गज कंपनी एप्पल में अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं। इस कदम ने कई निवेशकों और विश्लेषकों को हैरान कर दिया है। जानकार सोच रहे हैं कि बफेट को ऐसा क्या दिख रहा है जो हम बाकी लोगों को नहीं दिख रहा। असल में एप्पल एक ऐसी कंपनी है जिसने लगातार शानदार फाइनेंशियल रिजल्ट पेश किए हैं और इसकी मार्केट कैपिटल 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। वहीं सालाना बिक्री 380 बिलियन डॉलर से अधिक है। तो, बफेट के एप्पल के शेयर बेचने के फैसले के पीछे क्या कारण हो सकता है?
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कैश जमा कर रहे बफेट
माना जाता है कि वॉरेन बफेट एक चीज पर फोकस करते हैं। वे हमेशा काफी मात्रा में कैश जमा करते हैं। बर्कशायर हैथवे, वह ग्रुप जिसके प्रमुख बफेट हैं, अपने बड़े कैश भंडार के लिए जाना जाता है। इसका कैश भंडार बढ़कर 189 बिलियन डॉलर (15.75 लाख करोड़ रु) तक पहुंच गया है। ये कंपनी के इतिहास में सबसे अधिक कैश भंडार का लेवल है।
यह कैश भंडार अकसर बफेट के लिए एक कुशन के रूप में काम करता है, जिससे उन्हें बाजार में उथल-पुथल के समय निवेश के अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिलती है।
मार्केट क्रैश से पहले बढ़ाते हैं कैश
दिलचस्प बात यह है कि बफेट के पास शेयर बाजार में बड़ी गिरावट से ठीक पहले कैश पॉजिशन बनाने का ट्रैक रिकॉर्ड है। 1990 के दशक के अंत में डॉट-कॉम बुलबुले के दौरान, बर्कशायर हैथवे की कैश होल्डिंग्स में वृद्धि हुई और 2008 के वित्तीय संकट से पहले भी यही पैटर्न सामने आया।
इससे कुछ लोगों का मानना है कि अब बफेट को किसी संकट का आभास हो रहा है, जिसके कारण उन्होंने अपनी एप्पल में हिस्सेदारी घटाई है और बर्कशायर कैश बढ़ा रही है।
अनिश्चितता से बचाव की तैयारी
ऐसे माहौल में जब शेयर बाजार वैल्यूएशन के हिसाब से बढ़ा हुआ माना जाता है, तो बफेट का कैश बढ़ाना किसी अचानक आने वाले संकट या अनिश्चितता से बचाव (हेजिंग) वाला कदम हो सकता है। Apple में अपने निवेश को कम करके, वह प्रभावी रूप से अपनी होल्डिंग्स में डायवर्सिफिकेशन ला सकते हैं और एक सिंगल स्टॉक पर अपनी निर्भरता को कम कर सकते हैं।
