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भोजन हुआ सस्ता, मांसाहारी थाली के दाम में अधिक गिरावट, आखिर कैसे, डिटेल में जानें

Vegetarian thali and non-vegetarian thali became cheaper: मई महीने में घर का बना खाना थोड़ा सस्ता हो गया। इस दौरान शाकाहारी भोजन के मुकाबले मांसाहारी थाली के दाम में अधिक गिरावट रही। पिछले साल कम पैदावार से जुड़ी चिंताओं के कारण टमाटर की कीमतों में तेजी देखी गई थी। इसके अलावा आलू की कीमतें बढ़ गई थीं, प्याज की कीमतें भी बढ़ गई थीं।

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कैसे सस्ती हुई थाली?

Vegetarian thali and non-vegetarian thali became cheaper : मई महीने में शाकाहारी थाली और मांसाहारी थाली दोनों सस्ता हो गया। क्रिसिल इंटेलिजेंस की मासिक रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 में शाकाहारी थाली की कीमत घटकर 26.2 रुपये हो गई। अप्रैल 2025 में यह कीमत 26.3 रुपये थी, जबकि मई 2024 में 27.8 रुपये थी। इसमें टमाटर, प्याज और आलू की कीमतें घटने का योगदान रहा।

मांसाहारी थाली की लागत में तेज गिरावट

मांसाहारी थाली की कीमत में ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। मई में यह घटकर 52.6 रुपये रह गई, जबकि अप्रैल में 53.9 रुपये और मई 2024 में 55.9 रुपये थी। यह गिरावट मुख्यतः ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में कमी के चलते आई।

सब्जियों की कीमतों में बड़ी कमी

थाली की लागत घटने में सबसे बड़ा योगदान टमाटर (29%), प्याज (15%) और आलू (16%) की कीमतों में कमी का रहा। बीते वर्ष खराब पैदावार, फसलों में बीमारी और जल संकट जैसे कारणों से इन सब्जियों की कीमतें बढ़ गई थीं।

ब्रॉयलर चिकन सस्ता हुआ, मांसाहारी थाली में राहत

मांसाहारी थाली में सबसे ज्यादा लागत ब्रॉयलर चिकन की होती है (करीब 50%)। रिपोर्ट के अनुसार, ब्रॉयलर की कीमतों में 6% की गिरावट आई है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में बर्ड फ्लू की खबरों से मांग में कमी आई, जिससे आपूर्ति बढ़ गई और कीमतें घट गईं।

गैस और आयात शुल्क बढ़ने से राहत सीमित

हालांकि खाद्य वस्तुओं के दाम घटे हैं, रसोई गैस की कीमत में 6% वृद्धि और आयात शुल्क में बढ़ोतरी के कारण थाली की लागत में गिरावट सीमित रही।

मई में महीने-दर-महीने बदलाव

अप्रैल की तुलना में मई में टमाटर के दाम 10% बढ़े, आलू के दाम 3% बढ़े, जबकि प्याज की कीमतों में 10% की गिरावट आई। ब्रॉयलर की कीमतों में भी 4% की गिरावट दर्ज की गई। इसका असर मासिक आधार पर थाली की लागत पर हल्का पड़ा।

भविष्य का रुझान

क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पूषन शर्मा के मुताबिक मौसमी बदलाव से सब्जियों के दाम फिर बढ़ सकते हैं। गेहूं और दालों की कीमतें स्थिर या थोड़ी नरम रह सकती हैं। चावल के निर्यात में 20–25% की वृद्धि संभव है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चावल की मांग बढ़ रही है। (इनपुट भाषा)

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रामानुज सिंह
रामानुज सिंह Author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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