US Tariff Case: भारत पर टैरिफ को लेकर आज अमेरिकी अदालत का अहम फैसला, क्या ट्रंप को लगेगा झटका?
- Authored by: रिचा त्रिपाठी
- Updated Jan 8, 2026, 10:42 AM IST
अमेरिका द्वारा भारत समेत कई देशों पर लगाए गए हाई टैरिफ को लेकर आज अमेरिकी अदालत में बड़ा फैसला आने वाला है। यह मामला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान लगाए गए टैरिफ से जुड़ा है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लागू किया गया था। अदालत का यह फैसला तय करेगा कि ये टैरिफ आगे भी लागू रहेंगे या इन्हें हटाने की राह खुलेगी। अब सबकी नजर इस पर है कि क्या कोर्ट के फैसले से ट्रंप को झटका लगेगा या टैरिफ नीति को कानूनी मंजूरी मिल जाएगी।
Trump Tariff
अमेरिका में आज भारत पर लगाए गए टैरिफ को लेकर बड़ा फैसला आने वाला है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ की वैधता पर अपना रुख साफ कर सकता है। इस फैसले का असर न सिर्फ भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर पड़ेगा, बल्कि भारतीय निर्यातकों की आगे की रणनीति भी इसी पर टिकी है। यह फैसला तय करेगा कि भारतीय कंपनियां अमेरिका के लिए गर्मियों के सीजन के ऑर्डर बचा पाएंगी या फिर अमेरिकी खरीदार हमेशा के लिए हाथ से निकल सकते हैं। खास बात यह है कि यह फैसला ऐसे समय आने वाला है, जब भारत-अमेरिका के बीच कोई ठोस व्यापार समझौता भी नहीं हो पाया है। सवाल यह है कि क्या कोर्ट का फैसला ट्रंप के टैरिफ प्लान को झटका देगा या भारतीय कंपनियों की मुश्किलें और बढ़ेंगी?
अमेरिका में फैसले की घड़ी
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार से अपने सत्र की शुरुआत कर रही है और माना जा रहा है कि इसी दौरान उन मामलों पर भी फैसला आ सकता है, जिनमें 1977 के आपातकालीन कानून के तहत लगाए गए टैरिफ को चुनौती दी गई है। नवंबर में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के कई जजों ने इस बात पर सवाल उठाए थे कि क्या ट्रंप प्रशासन के पास राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर इतने व्यापक टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार था। इसी वजह से अब यह मामला और भी संवेदनशील बन गया है।
भारत के लिए इस फैसले का समय बेहद नाजुक है। अभी भारतीय निर्यातकों को अमेरिका में 50 फीसदी तक का टैरिफ चुकाना पड़ रहा है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि जनवरी का महीना एक तरह से अंतिम समय सीमा बन चुका है। अमेरिका के खरीदार गर्मियों के सीजन के लिए ऑर्डर देने से रुक गए हैं, खासकर कपड़ा, फुटवियर, लेदर और टेक्सटाइल जैसे सेक्टर में। ये सभी सेक्टर सीजन पर आधारित होते हैं और इनमें बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है।
भारतीय निर्यातकों के लिए क्यों है टेंशन?
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय के मुताबिक, गर्मियों के ऑर्डर अब तक फाइनल हो जाने चाहिए थे। लेकिन अमेरिकी खरीदार जनवरी के अंत तक इंतजार कर रहे हैं, ताकि यह साफ हो सके कि भारत और अमेरिका के बीच कोई व्यापार समझौता होता है या नहीं। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो वे दूसरे देशों की ओर रुख कर सकते हैं।
निर्यातकों की चिंता सिर्फ ऑर्डर में देरी को लेकर नहीं है, बल्कि बाजार हमेशा के लिए खोने का डर भी है। उद्योग जगत का कहना है कि एक बार अगर विदेशी कंपनियां किसी और देश से माल मंगवाने लगती हैं, तो उन्हें वापस भारत की ओर लाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
टैरिफ का असर
टैरिफ का असर पहले ही दिखने लगा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, क्रिसमस और न्यू ईयर के दौरान भारतीय निर्यातकों को कम ऑर्डर मिले, जिसके चलते कई फैक्ट्रियों को उत्पादन घटाना पड़ा। अगर जल्द राहत नहीं मिली, तो अमेरिकी खरीदार गर्मियों के शॉपिंग सीजन से पहले अपनी सप्लाई चेन दूसरे देशों में शिफ्ट कर सकते हैं।
तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स में चिंता और ज्यादा है। यहां उद्योगों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कुछ हफ्तों की देरी भी नौकरी जाने और फैक्ट्रियां बंद होने जैसी स्थिति पैदा कर सकती है।
इस अनिश्चितता के बीच भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद है। अजय सहाय का कहना है कि अगर कोर्ट टैरिफ को रद्द कर देती है, तो इससे तुरंत राहत मिलेगी। हालांकि, पूर्व वाणिज्य सचिव अजय दूआ का मानना है कि भले ही फैसला भारत के पक्ष में आए, लेकिन इसके असर की भी एक सीमा होगी। उन्होंने कहा कि ऐसे में व्हाइट हाउस फैसले को चुनौती दे सकता है और राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर फिर से टैरिफ लगाने की कोशिश कर सकता है।
ट्रेड डील कहां तक पहुंची?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत अभी भी जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। ट्रंप खुद यह स्वीकार कर चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऊंचे टैरिफ से नाराज हैं। साथ ही अमेरिका ने रूस से तेल खरीद को लेकर भी भारत पर दबाव बनाया है। आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर में भारत का रूसी तेल आयात तीन साल के निचले स्तर पर आ गया है।
उद्योग जगत का कहना है कि अगर टैरिफ में आंशिक कटौती भी होती है, तो इससे राहत मिल सकती है। लेकिन समय तेजी से निकलता जा रहा है। निर्यातकों के मुताबिक, फुटवियर और परिधान जैसे सेक्टर में जनवरी के बाद इंतजार की गुंजाइश नहीं बचती। अब सबकी नजरें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। यह फैसला तय करेगा कि जनवरी भारतीय निर्यातकों के लिए राहत लेकर आएगा या फिर अमेरिकी बाजार में एक बड़े बदलाव की शुरुआत करेगा।
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