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UPI MDR चार्ज पर लग सकता है ब्रेक! NPCI की बैठक के बाद हो सकता है ऐलान

15 अक्टूबर से लागू होने वाले UPI MDR चार्ज को टालने की मांग उठी है। व्यापारिक संगठनों ने त्योहारों के सीजन को देखते हुए NPCI से इसे दिसंबर के अंत या अगले साल तक टालने का अनुरोध किया है।

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NPCI की बैठक के बाद हो सकता है ऐलान

UPI से पेमेंट करने वाले लोगों और कारोबारियों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले नए UPI MDR चार्ज को टालने की मांग की गई है। व्यापारिक संगठनों ने नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से अनुरोध किया है कि त्योहारों के सीजन को देखते हुए इस व्यवस्था को दिसंबर के अंत या अगले साल की शुरुआत तक टाल दिया जाए। इस दौरान बाजार में खरीदारी बढ़ती है और दुकानदारों के यहां UPI से बड़ी संख्या में पेमेंट होते हैं। ऐसे में कारोबारियों को नए नियमों के लिए तैयारी का समय देने की मांग उठी है।

क्या है UPI MDR चार्ज?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारियों के लेनदेन पर लागू होता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होना है। यह शुल्क पेमेंट से जुड़े बैंक और अन्य सेवा प्रदाताओं के बीच बांटा जाता है। हालांकि, यह व्यवस्था हर UPI ट्रांजैक्शन पर लागू नहीं होगी। आम लोगों के एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में पैसे भेजने वाले Person-to-Person (P2P) ट्रांजैक्शन इस चार्ज से बाहर रहेंगे।

कारोबारी क्यों कर रहे हैं चार्ज टालने की मांग?

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि त्योहारों के दौरान दुकानों, शोरूम और दूसरे कारोबारों में बिक्री बढ़ जाती है। इस समय ग्राहक कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू सामान और दूसरी चीजों की खरीदारी के लिए डिजिटल पेमेंट का खूब इस्तेमाल करते हैं। अगर इसी दौरान नए MDR नियम लागू होते हैं, तो कारोबारियों को अपनी पेमेंट व्यवस्था और खर्चों की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है। इसलिए संगठनों ने मांग की है कि नए नियम लागू करने की तारीख आगे बढ़ाई जाए, ताकि कारोबारियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

क्या 15 अक्टूबर से लागू नहीं होगा नया नियम?

इस मामले में व्यापारिक संगठनों ने NPCI को प्रस्ताव भेजा था। 8 अक्टूबर को आई रिपोर्टों के मुताबिक, उस समय NPCI सभी संबंधित पक्षों से बातचीत के बाद फैसले पर विचार कर रहा था। बाद की रिपोर्टों में व्यवस्था को 1 जनवरी 2027 तक टालने की संभावना भी सामने आई। इसका उद्देश्य त्योहारों के दौरान कारोबारियों और पेमेंट से जुड़े संस्थानों को अतिरिक्त समय देना है। हालांकि, तारीख में बदलाव और उसके लागू होने की आधिकारिक स्थिति की पुष्टि संबंधित अधिसूचना से करना जरूरी है।

क्या आम लोगों को UPI पेमेंट पर पैसे देने होंगे?

सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, MDR कारोबारी पेमेंट व्यवस्था से जुड़ा शुल्क है, जिसे ग्राहकों से सीधे वसूलने वाला सामान्य UPI चार्ज नहीं माना गया है। व्यक्तिगत तौर पर एक बैंक खाते से दूसरे खाते में पैसे भेजना पहले की तरह मुफ्त रहेगा। 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट और शून्य MDR के दायरे में आने वाले छोटे कारोबारियों के लेनदेन पर भी यह शुल्क लागू नहीं होगा। सरकार के मुताबिक, करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजैक्शन इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल इस मामले में सबसे अहम बात नए MDR नियमों की अंतिम लागू तारीख है। अगर इसे आगे बढ़ाया जाता है, तो कारोबारियों को त्योहारों के सीजन में राहत मिल सकती है। वहीं, नियमों में बदलाव न होने पर संबंधित मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर तय व्यवस्था लागू होगी। इसलिए कारोबारियों और ग्राहकों को NPCI तथा सरकार की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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