भारत में सोने और चांदी की मांग हमेशा आसमान पर रहती है, खासकर त्योहारों और शादियों के सीजन में। इस मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर विदेशों से सोना मंगवाया जाता है। हाल ही में भारत सरकार और विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए उन संस्थानों की सूची जारी की है, जो अब आधिकारिक तौर पर देश में सोने और चांदी का आयात कर सकेंगे। नए नियमों के मुताबिक, अब केवल 15 चुनिंदा बैंक ही विदेशों से सोना और चांदी मंगवाने के लिए अधिकृत होंगे। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य बुलियन मार्केट (Bullion Market) में पारदर्शिता लाना और आयात की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सोने का आयात भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) पर सीधा असर डालता है। सरकार चाहती है कि सोने का आयात केवल वही संस्थान करें जो कड़े नियमों और रिजर्व बैंक (RBI) की गाइडलाइंस का पालन करते हों। पहले कई एजेंसियां और बैंक इस प्रक्रिया में शामिल थे, लेकिन अब सरकार ने इस लिस्ट को सीमित कर दिया है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा के प्रबंधन में आसानी होगी, बल्कि बाजार में सोने की सप्लाई और कीमतों पर भी बेहतर नियंत्रण रखा जा सकेगा। इन 15 बैंकों को एक निश्चित अवधि के लिए यह अनुमति दी गई है, जिसे उनके प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकता है।
कौन से बैंक कर पाएंगे इंपोर्ट?
सरकार द्वारा जारी सूची में देश के लगभग सभी बड़े सरकारी और निजी बैंकों को शामिल किया गया है। इनमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI), एचडीएफसी बैंक (HDFC), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI), एक्सिस बैंक (Axis Bank), और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं। इसके अलावा कुछ अन्य महत्वपूर्ण नाम जैसे इंडसइंड बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, और यस बैंक को भी इस लिस्ट में जगह मिली है। ये बैंक अब ज्वेलर्स और अन्य अधिकृत संस्थाओं के लिए विदेशों से सोने और चांदी के बार या बिस्कुट मंगवा सकेंगे।
ज्वेलर्स और आम जनता पर क्या होगा असर?
आम आदमी के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि बाजार में उपलब्ध सोने की शुद्धता और उसकी सोर्सिंग अब अधिक भरोसेमंद होगी। चूंकि केवल प्रमुख बैंक ही आयात करेंगे, इसलिए सोने की तस्करी (Smuggling) पर लगाम लगेगी और बैंकिंग चैनलों के जरिए ही बाजार में सोना पहुंचेगा। हालांकि, ज्वेलर्स के लिए अब विकल्पों की संख्या थोड़ी सीमित हो गई है, उन्हें अब इन्हीं 15 बैंकों के माध्यम से अपनी जरूरतें पूरी करनी होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से बुलियन बैंकिंग को बढ़ावा मिलेगा और भारत को वैश्विक स्वर्ण बाजार में एक व्यवस्थित खिलाड़ी के रूप में देखा जाएगा।
