सफलता रातों-रात नहीं मिलती, इसके पीछे सालों का संघर्ष और कभी न हार मानने वाला जज्बा होता है। दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी हुंडई (Hyundai) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। हुंडई (Hyundai) आज दुनिया की तीसरी और भारत की दूसरी सबसे बड़ी ऑटो दिग्गज कंपनी है, लेकिन इसकी सफलता की नींव एक साधारण किसान के बेटे के संघर्षों पर टिकी है। इस साम्राज्य की स्थापना करने वाले चुंग जू-युंग ने गरीबी से निकलकर न केवल खुद को दक्षिण कोरिया का सबसे अमीर शख्स बनाया, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर भी बदल दी।
उनका सफर आसान नहीं था; करियर की शुरुआत में उन्होंने मजदूर और कुली तक का काम किया। कई बार उनका बना-बनाया बिजनेस पूरी तरह तबाह हुआ, लेकिन हर फेलिअर ने उनके इरादों को और मजबूत किया। हाल ही में हुंडई इंडिया का देश का सबसे बड़ा IPO लाना, चुंग के उसी विजन और अटूट साहस का प्रमाण है। आज पूरा दक्षिण कोरिया उन पर नाज करता है, क्योंकि उन्होंने साबित किया कि अगर हार न मानी जाए, तो एक छोटी सी शुरुआत से भी वैश्विक साम्राज्य खड़ा किया जा सकता है।
घर से भागे...
चुंग जू-युंग का जन्म 1915 में वर्तमान उत्तर कोरिया के एक बेहद गरीब किसान परिवार में हुआ था। आठ भाई-बहनों में सबसे बड़े होने के नाते उन पर परिवार की जिम्मेदारी थी, लेकिन वे किसानी की गरीबी में नहीं मरना चाहते थे। वे कुछ बड़ा करने का सपना लेकर सियोल भागना चाहते थे। पहली तीन कोशिशों में वे नाकाम रहे और उनके पिता उन्हें वापस ले आए। लेकिन चौथी बार, उन्होंने अपने पिता की इकलौती गाय बेच दी और उन पैसों से ट्रेन का टिकट कटाकर सियोल पहुंच गए। यही वह मोड़ था जिसने भविष्य की 'हुंडई' की नींव रखी।
चावल की दुकान से ऑटो रिपेयर तक का सफर
सियोल में चुंग ने निर्माण मजदूर और कुली के रूप में कठिन काम किया। बाद में उन्हें एक चावल की दुकान पर नौकरी मिली। उनकी ईमानदारी और मेहनत से प्रभावित होकर दुकान के मालिक ने मरने से पहले वह दुकान चुंग के नाम कर दी। हालांकि, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापानी कब्जे की वजह से वह कारोबार बंद हो गया। लेकिन चुंग ने हार नहीं मानी। 1940 में उन्होंने एक ऑटो रिपेयर शॉप (कार मरम्मत की दुकान) खरीदी। यहीं से उनका झुकाव मशीनों और कारों की तरफ बढ़ा। हालांकि यह वर्कशॉप भी आग लगने के कारण जल गई, पर चुंग ने कर्ज लेकर उसे फिर से खड़ा किया।
हुंडई की शुरुआत
1947 में चुंग ने 'हुंडई सिविल इंडस्ट्रीज' की स्थापना की, जो शुरुआत में निर्माण कार्य (Construction) से जुड़ी थी। युद्ध के बाद दक्षिण कोरिया के पुनर्निर्माण में चुंग की कंपनी ने बड़े-बड़े बांध, पुल और राजमार्ग बनाए। चुंग का मानना था कि "यदि आप रास्ता नहीं खोज सकते, तो खुद रास्ता बनाओ।" 1967 में उन्होंने हुंडई मोटर कंपनी (Hyundai Motor Company) की शुरुआत की। उस समय कोरिया में कार बनाना एक असंभव सपना माना जाता था, लेकिन चुंग ने फोर्ड के साथ समझौता किया और बाद में अपनी पहली स्वदेशी कार 'पोनी' (Pony) लॉन्च करके पूरी दुनिया को चौंका दिया।
एक विजन जिसने दुनिया बदल दी
चुंग जू-युंग केवल एक बिजनेसमैन नहीं थे, वे एक दूरदर्शी इंसान थे। जब विशेषज्ञों ने कहा कि दक्षिण कोरिया जहाज नहीं बना सकता, तो चुंग ने दुनिया का सबसे बड़ा शिपयार्ड (Hyundai Heavy Industries) खड़ा कर दिया। उन्होंने हमेशा असंभव लगने वाले लक्ष्यों को चुनौती दी। उनकी सफलता का सबसे बड़ा मंत्र था "असंभव जैसा कुछ नहीं है, बस आपके पास उसे करने का साहस होना चाहिए।" आज हुंडई न केवल कारें बनाती है, बल्कि इंजीनियरिंग, निर्माण और शिपिंग के क्षेत्र में भी दुनिया का नेतृत्व करती है।
