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Stock Market Trend : क्या बाजार की दिवाली होगी काली, रिकवरी की कितनी उम्मीद?

शेयर बाजार खासतौर पर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही करीब 18 महीने के लो पर है। पिछले दो साल बाजार में बेहद निराशाजनक रहे हैं। ऐसे में दिवाली के दौरान भी क्या बाजार लुढ़का हुआ रहेगा?

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दिवाली तक बाजार में कैसा रहेगा माहौल

Stock Market Trend : भारतीय शेयर बाजार में सितंबर से जारी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। दिवाली से पहले बाजार में रिकवरी की उम्मीद जरूर है, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली, महंगा क्रूड ऑयल, कमजोर रुपया और ब्याज दरों का दबाव तेजी की राह में बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या दिवाली तक बाजार संभलेगा या निवेशकों को अभी और उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा?

भारतीय शेयर बाजार के लिए अक्टूबर की शुरुआत काफी मुश्किल रही है। सितंबर में करीब 6% टूटने के बाद निफ्टी लगातार 8 सप्ताह की गिरावट का सामना कर चुका था। 8 अक्टूबर को बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स 71,593.24 पर और निफ्टी 22,231.80 पर बंद हुआ। सेंसेक्स का यह करीब 32 महीने और निफ्टी का करीब 18 महीने का निचला क्लोजिंग स्तर था।

हालांकि, 9 अक्टूबर को बाजार में कुछ राहत देखने को मिली। आईटी शेयरों में खरीदारी और क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी से सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी आई। लेकिन निवेशकों के सामने असली सवाल यह है कि क्या यह तेजी दिवाली तक टिक पाएगी या फिर इसे महज एक राहत रैली मानना चाहिए?

बाजार पर क्यों बना हुआ है दबाव?

शेयर बाजार की कमजोरी के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण एक साथ काम कर रहे हैं।

  1. पहला बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। क्रूड महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा होता है।
  2. दूसरा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली है। विदेशी निवेशकों की निकासी से शेयरों की मांग प्रभावित होती है और बाजार में तेजी टिकना मुश्किल हो सकता है।
  3. तीसरा कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती है। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में निवेश का आकर्षण घट रहा है।
  4. इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करके इसे 5.5% करने से भी ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है। हालांकि, महंगाई और रेपा का बहुत हद तक संबंध क्रूड के दाम से है।

क्या दिवाली से पहले रिकवरी संभव है?

क्या बाजार बॉटम बना चुका है? इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। लेकिन, ज्यादातर एक्सपर्ट यह मानते हैं कि निवेशकों को बाजार का परफेक्ट बॉटम तलाशने की जगह मौजूदा गिरावट को निवेश के मौके के तौर पर देखना चाहिए। इसके अलावा पूरी पूंजी एक साथ किसी एक एसेट में लगाने की जगह डायवर्सिफाइ करते हुए अलग-अलग एसेट्स में लगाने की सलाह दे रहे हैं। क्योंकि, ज्यादातर एक्सपर्ट यह मान रहे हैं कि जैसे ही पश्चिम एशिया में हालात सुधरेंगे और क्रूड के दाम घटेंगे, तो तेज गिरावट के बाद बाजार में खरीदारी लौट सकती है। वैल्यूएशन में सुधार से उन कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है, जिनकी कमाई और कारोबारी प्रदर्शन मजबूत है।

SMC Global Securities की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट सीमा श्रीवास्तव के मुताबिक बाजार की चाल संस्थागत निवेश, महंगाई, ब्याज दरों की उम्मीदों और कंपनियों के नतीजों पर निर्भर करेगी। उनके मुताबिक, बाजार में व्यापक तेजी के बजाय मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में चुनिंदा अवसर ज्यादा अहम हो सकते हैं।

इसी तरह SS WealthStreet की फाउंडर सुगंधा सचदेवा ने भी गिरावट के बाद तेज रिकवरी की संभावना का जिक्र किया है। हालांकि, ऐसी तेजी कितनी टिकाऊ होगी, यह विदेशी निवेशकों की वापसी, कंपनियों की कमाई और भू-राजनीतिक तनाव में कमी पर निर्भर करेगा। इसका मतलब है कि दिवाली से पहले तेजी की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन केवल बाजार के गिरने के आधार पर बड़ी रिकवरी का अनुमान लगाना जोखिम भरा हो सकता है।

क्या कंपनियों के नतीजे बाजार को सहारा देंगे?

सितंबर तिमाही के नतीजे बाजार की दिशा तय करने वाले बड़े संकेतों में शामिल होंगे। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक 5 ब्रोकरेज के अनुमानों में निफ्टी की 50 कंपनियों का संयुक्त मुनाफा सालाना आधार पर करीब 20% बढ़ने की संभावना है। खासतौर पर ऑटो और टेक्नोलॉजी सेक्टर से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है, जबकि वित्तीय कंपनियों की कमाई भी बाजार के लिए अहम रहेगी। हालांकि, महंगे क्रूड, लागत के दबाव और कमजोर मांग से कुछ कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित कर सकते हैं। अगर कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो इससे निवेशकों का भरोसा लौट सकता है।

दिवाली तक किन संकेतों पर रखें नजर?

क्रूड ऑयल अकेला सबसे बड़ा ट्रिगर एरिया हैं, जहां सुधार आने से पूरे बाजार को सहारा मिल सकता है। लेकिन यदि क्रूड महंगा बना रहता है और विदेशी निवेशकों की निकासी जारी रहती है, तो रिकवरी की राह मुश्किल हो सकती है।

बाजार का संकेत

तेजी के लिए क्या जरूरी है?

क्रूड ऑयल

कीमतों में लगातार गिरावट

विदेशी निवेशक (FII)

बिकवाली में कमी और खरीदारी की वापसी

रुपया

डॉलर के मुकाबले रुपये में स्थिरता

कंपनियों के नतीजे

मुनाफे में बढ़ोतरी और मजबूत ग्रोथ आउटलुक

ग्लोबल बाजार

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और भू-राजनीतिक तनाव में कमी

घरेलू निवेश (DII)

घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी और पर्याप्त लिक्विडिटी

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

दिवाली के करीब आते ही बाजार में तेजी की उम्मीद बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन निवेश का फैसला केवल त्योहार, मुहूर्त ट्रेडिंग या किसी एक दिन की तेजी देखकर नहीं करना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कंपनी की कमाई, कर्ज, वैल्यूएशन और कारोबारी संभावनाएं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। वहीं, शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को बाजार में तेज उतार-चढ़ाव और अचानक आने वाली खबरों के जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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