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SpiceJet को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, ₹144 करोड़ जमा करने की मोहलत बढ़ाने की अर्जी खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 जुलाई 2026 के आदेश में स्पाइसजेट और अजय सिंह को 45 दिनों के भीतर ₹50 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया था। अदालत ने इसे अपने आदेशों का पालन करने की उनकी मंशा साबित करने के लिए जरूरी माना था।

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गुरुग्राम की संपत्ति के दस्तावेज जमा करने की मांग भी खारिज

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दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 अक्टूबर को स्पाइसजेट लिमिटेड और उसके प्रबंध निदेशक अजय सिंह की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें ₹144 करोड़ जमा करने के लिए और समय मांगा गया था। यह रकम पहले के अदालती आदेशों के तहत जमा की जानी है। कंपनी और अजय सिंह ने अदालत में व्यक्तिगत आश्वासन भी दिया था कि वे रकम जमा करेंगे।

₹50 करोड़ और बाकी ₹94 करोड़ जमा करने का था निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 जुलाई 2026 के आदेश में स्पाइसजेट और अजय सिंह को 45 दिनों के भीतर ₹50 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया था। अदालत ने इसे अपने आदेशों का पालन करने की उनकी मंशा साबित करने के लिए जरूरी माना था। बाकी ₹94 करोड़ 90 दिनों के भीतर जमा किए जाने थे। कुल रकम ₹144 करोड़ है।

गुरुग्राम की संपत्ति के दस्तावेज जमा करने की मांग भी खारिज

स्पाइसजेट ने समय बढ़ाने की मांग के साथ हरियाणा के गुरुग्राम स्थित उद्योग विहार की अपनी संपत्ति के कागजात जमा करने की अनुमति भी मांगी थी। अदालत ने इस मांग को भी खारिज कर दिया। हालांकि, अदालत ने टिप्पणी की कि अगर स्पाइसजेट ने पहली किस्त के रूप में ₹50 करोड़ जमा कर दिए होते, तो वह संपत्ति के दस्तावेज जमा करने के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए तैयार हो सकती थी।

सुप्रीम कोर्ट ने भी दखल देने से किया था इनकार

इस मामले में 19 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पाइसजेट और अजय सिंह को मध्यस्थता से जुड़े बकाया भुगतान की रकम जमा करने के दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों में दखल देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में समय बढ़ाने की मांग की थी।

कलानिधि मारन और काल एयरवेज से जुड़ा है मामला

यह विवाद काल एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड और कलानिधि मारन के पक्ष में दिए गए आर्बिट्रेशन अवॉर्ड से जुड़ा है। एक तरफ इस अवॉर्ड को लागू करने के लिए कार्यवाही चल रही है, वहीं दूसरी तरफ स्पाइसजेट और अजय सिंह ने मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34 के तहत अवॉर्ड को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने स्पाइसजेट के अनुरोध पर धारा 34 की याचिका पर कार्यवाही नवंबर 2026 तक टाल दी थी, लेकिन रकम जमा करने की शर्त रखी थी। मामले में डिक्री धारकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत मेहता पेश हुए। उनके साथ करंजावाला एंड कंपनी के वकील भी मौजूद थे। स्पाइसजेट और अजय सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल ने पैरवी की।

क्या है स्पाइसजेट और काल एयरलाइन विवाद?

स्पाइसजेट और कलानिधि मारन के बीच विवाद की शुरुआत एयरलाइन में हिस्सेदारी के हस्तांतरण और शेयरों से जुड़े वित्तीय दायित्वों को लेकर हुई थी। फरवरी 2015 में कलानिधि मारन और उनकी कंपनी काल एयरवेज ने स्पाइसजेट में अपनी हिस्सेदारी अजय सिंह को ट्रांसफर की थी। इसके बाद शेयर वारंट और उनसे जुड़े भुगतान को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ। मामला मध्यस्थता ट्रिब्यूनल पहुंचा, जिसने मारन और काल एयरवेज के पक्ष में भुगतान का अवॉर्ड दिया। स्पाइसजेट और अजय सिंह ने इस अवॉर्ड को अदालत में चुनौती दी, जबकि मारन और काल एयरवेज उसकी रकम वसूलने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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