भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आज (8 अप्रैल, 2026, बुधवार) रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखा। मौद्रिक नीति के बारे में जानकारी देते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि ईरान युद्ध के चलते संघर्ष महंगाई, विकास और वित्तीय स्थितियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इन सभी चुनौतियों के बीच एक अच्छी खबर है कि आने वाले दिनों में बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि 10-साल के G-Sec यील्ड, महंगाई दर, डिपॉजिट-क्रेडिट अनुपात और छोटी बचत योजनाओं की आकर्षक ब्याज दरों जैसे संकेतक इसी ओर इशारा कर रहे हैं।
महंगाई बढ़ने का अनुमान
रेपो रेट की घोषणा करने के बाद, RBI गवर्नर ने महंगाई से जुड़ी उन चुनौतियों पर रोशनी डाली, जिनका सामना भारत को वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण करना पड़ सकता है। वहीं, इजरायल और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से विकास की गति धीमी पड़ने की संभावना है। RBI गवर्नर ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 27 के लिए CPI महंगाई दर 4.6% रहने का अनुमान है। तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2026) के लिए, यह दर 5.2% के ऊंचे स्तर पर रहने का अनुमान है। बता दें कि दिसंबर 2025 में महंगाई दर 1.33% थी, जो बढ़कर फरवरी में 3.21% हो गई। मार्च के आंकड़े अभी आने बाकी हैं। लेकिन युद्ध और सप्लाई चेन में रुकावटों के कारण कीमतों पर पड़ रहे वैश्विक दबाव से संकेत मिलता है कि महंगाई अभी और बढ़ने वाली है।
एफडी पर घटीं थी ब्याज दरें
RBI ने पिछले साल (2025) रेपो रेट में 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी, जिससे आमतौर पर 2025 की पहली छमाही में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाली ब्याज दरें कम हो गई थीं। हालांकि, उसके बाद से, केंद्रीय बैंक ने लगातार रेपो रेट को उसी स्तर पर बनाए रखा है, जिससे कई FD निवेशकों को राहत मिली है। फिर भी, युद्ध के कारण बदलते भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए, जिससे महंगाई बढ़ रही है, यह ठहराव एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। बैंकों द्वारा FD पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है।
जानकारों का कहना है कि FD दरें केवल रेपो रेट पर ही निर्भर नहीं करतीं, बल्कि वे लिक्विडिटी की स्थिति, महंगाई के रुझान, G-Securities की यील्ड और छोटी बचत योजनाओं से मिलने वाली प्रतिस्पर्धा से भी प्रभावित होती हैं। आइए देखें कि ये संकेतक FD दरों के बारे में क्या बताते हैं।
