Gold Loan Rules: वित्त मंत्रालय ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा है कि दो लाख रुपये तक के छोटे गोल्ड लोन लेने वालों को प्रस्तावित नए दिशानिर्देशों से बाहर रखा जाए। यह कदम तमिलनाडु में इन नियमों के विरोध के बीच उठाया गया है। आरबीआई ने 9 अप्रैल को सोना गिरवी रखकर लिए जाने वाले ऋणों के लिए एक मसौदा नीति जारी की थी, जिसका उद्देश्य उधारकर्ताओं के हितों की सुरक्षा और प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना था। इसके तहत ऋणदाता शाखाओं में दस्तावेज और मूल्यांकन प्रक्रिया को मानकीकृत करने की बात कही गई थी।
वित्त मंत्रालय ने इस मसौदे की समीक्षा के बाद कहा कि इस तरह के नियमों को पूरी तरह लागू करने के लिए समय चाहिए और इन्हें 1 जनवरी 2026 से लागू किया जाना चाहिए।
छोटे ऋण लेने वालों को न मिले असुविधा
वित्त मंत्रालय ने यह सुझाव दिया है कि दो लाख रुपये तक के ऋण लेने वाले ग्राहकों को इन प्रस्तावित नियमों से छूट दी जाए, ताकि उन्हें समय पर और आसानी से ऋण मिल सके। मंत्रालय का कहना है कि इस तरह के उधारकर्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही नीति बनाई जानी चाहिए।
आरबीआई के दिशा-निर्देशों का तमिलनाडु में राजनीतिक दलों और किसान संगठनों द्वारा विरोध किया गया है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने इस मसले को गंभीर मानते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर नियमों पर पुनर्विचार की अपील की है। उन्होंने इन नियमों के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों पर पड़ने वाले पांच बड़े प्रभावों को भी रेखांकित किया।
आरबीआई का मसौदा क्या कहता है
आरबीआई के मसौदे में कहा गया है कि सोने की शुद्धता और वजन की जांच के लिए सभी शाखाओं में एक समान प्रक्रिया अपनाई जाए। साथ ही, ऋणदाताओं की वेबसाइट पर सभी नियमों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। दस्तावेज़ों में गिरवी रखे गए आभूषणों का विवरण, नीलामी प्रक्रिया और भुगतान की समयसीमा स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए।
मंत्रालय को उम्मीद है कि आरबीआई विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों और जनता की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए अंतिम दिशानिर्देश जारी करेगा।
भाषा इनपुट के साथ
