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सिर्फ 2 शेयरों ने कराई फजीहत! Reliance Insider Trading की पूरी कहानी, क्यों दी SEBI ने चेतावनी?

मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे बड़ी कंपनी है। लेकिन, सिर्फ 2 शेयरों के लेन-देन ने कंपनी को शर्मिंदा कर दिया है। इनसाइडर ट्रेडिंग के आरापे में कंपनी को SEBI ने चेतावनी दी है।

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रिलायंस इंडस्ट्रीज में इनसाइडर ट्रेडिंग पर सेबी सख्त

Reliance Insider Trading Vs SEBI : करीब 18 लाख करोड़ रुपये मार्केट कैप वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज को 7 हजार रुपये से भी कम कीमत के दो शेयरों के लेनदेन ने शर्मिंदा कर दिया है। शेयर बाजार के नियामक SEBI ने एशिया के दूसरे सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली Reliance Industries को Insider Trading से जुड़े नियमों के उल्लंघन के मामले में कड़ी चेतावनी जारी की है। सेबी के पत्र के अनुसार, रिलायंस के कर्मचारी महेश गोयल से जुड़ीं कामिनी जैन, इसके अलावा हिराई उमंग दोषी और हर्ष जैन ने उस समय रिलायंस के शेयरों में ट्रेडिंग की जब कंपनी की कुछ बेहद गोपनीय और संवेदनशील जानकारियां उनके पास थीं।

क्यों बेहद गंभीर इनसाइडर ट्रेडिंग का आरोप?

शेयर बाजार ऐसी जगह है, जहां दूसरों से पहले सटीक जानकारी आपको बेशुमार दौलत कमाने का मौका देती है। यही वजह है कि इनसाइडर ट्रेडिंग, जिसे भेदिया कारोबार भी कहा जाता है एक बेहद गंभीर माना जाता है। क्योंकि, किसी भी कंपनी के अंदर के लोगों को कंपनी के कुछ ऐसे फैसलों की बाकी लोगों से पहले जानकारी होती है, जो कंपनी के शेयरों प्राइस को प्रभावित कर सकते हैं। अक्सर शेयर बाजार में जब किसी बड़ी कंपनी का नाम इनसाइडर ट्रेडिंग में आता है, तो लोग करोड़ों-अरबों रुपये के हेरफेर की उम्मीद करते हैं। लेकिन भारत की सबसे मूल्यवान और दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के साथ एक ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसने पूरे कॉर्पोरेट जगत को हैरान कर दिया है।

SEBI ने क्यों चेतावनी दी?

रिलायंस इंडस्ट्रीज को मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) से एक सख्त प्रशासनिक चेतावनी पत्र (Administrative Warning Letter) जारी किया है। इस पत्र में कंपनी को इनसाइडर ट्रेडिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन को लेकर चेतावनी दी गई है।

सिर्फ 2 शेयर का अजीबोगरीब खेल?

सेबी (SEBI) की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस के दो कर्मचारियों और उनके एक करीबी रिश्तेदार के पास कंपनी की 'अप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील जानकारी' (UPSI) थी।हालांकि, इस जानकारी के होते हुए उन्होंने बाजार में जो सौदे किए, उनका आकार (Size) इतना छोटा था कि जानकर कोई भी हैरान रह जाए। सेबी की शुरुआती आपत्ति 2 शेयरों के लेनदेन को लेकर थी और बाद में जांच में कुछ और सौदे ऐसे मिले, जिनका लेनदेन इनसाइडर ट्रेडिंग से जुड़े नियमों का उल्लंघन करता है।

किन शेयरों के लेनदेन पर आपत्ति

सेबी ने इनसाइडर ट्रेडिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर रिलायंस को जारी पत्र में कहा, "उपर्युक्त उल्लंघन को सेबी ने गंभीरता से लिया है। सेबी की तरफ से निर्धारित नियामक प्रावधानों का पालन नहीं करने के लिए चेतावनी दी जाती है। आपको भविष्य में सतर्क रहने और अनुपालन मानकों में सुधार करने की सलाह दी जाती है, ताकि कानून के मौजूदा प्रावधानों के उल्लंघन के मामलों की पुनरावृत्ति से बचा जा सके, ऐसा नहीं करने पर सेबी अधिनियम, 1992 और उसके तहत बनाए गए नियमों और विनियमों के प्रावधानों के अनुसार आपके खिलाफ उचित कार्रवाई शुरू की जाएगी।"

आरोपी का नाम (Trader)तारीख (Date)शेयरों की संख्या (Shares)सौदे की कुल कीमत (Value)एक्शन (Buy/Sell)
हर्ष जैन5 जुलाई02 शेयर₹6,385खरीदा (Buy)
कामिनी जैन10 जुलाई35 शेयर₹1.1 लाखबेचा (Sell)
कामिनी जैन11 जुलाई25 शेयर₹78,871दोबारा खरीदा (Buy)
हिराई उमंग दोषी18 जुलाई15 शेयर₹47,625बेचा (Sell)

कौन है मुख्य आरोपी?

सेबी ने अपने पत्र में उन शेयरों के लेनदेन को तारीख के साथ बताया है, जिन्हें लेकर आपत्ति है। मोटे तौर पर सेबी ने कामिनी जैन को इस मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर देखा है, क्योंकि कामिनी जैन, रिलायंस के कर्मचारी महेश गोयल की करीबी रिश्तेदार (कनेक्टेड पर्सन) हैं। रिलायंस के कर्मचारी से जुड़े होने के कारण उनके पास जो जानकारी थी, उसका उन्होंने अपने व्यक्तिगत फायदे (शेयरों की खरीद-बिक्री) के लिए इस्तेमाल किया। इसी वजह से सेबी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को अपनी आंतरिक व्यवस्था सुधारने की सख्त हिदायत दी है ताकि आगे से कोई कर्मचारी या उसका रिश्तेदार ऐसा न कर सके।

2 शेयरों के लेनदेन बने सबूत

सेबी ने हर्ष जैन के इन 2 शेयरों को अकाट्य सबूत के तौर पर पेश किया है, जिनसे पता चलता है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के कर्मचारी और उनसे जुड़े लोग नियमों की अनदेखी कर रहे थे। रेगुलेटर ने इसी बात को बेहद गंभीरता से लेते हुए रिलायंस को अपनी आंतरिक अनुपालन व्यवस्था (Compliance Standards) सुधारने की सख्त हिदायत दी है।

    डिस्क्लेमर: TimesNow Navbharat किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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