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टैक्स के दायरे में न होने पर भी भरने लगेंगे ITR, जान लें ये 5 फायदे

ITR फाइल करने के ये 5 फायदे आपकी जिंदगी और बैंकिंग के कामों को बहुत आसान बना सकते हैं। आइए आपको बताते हैं जीरो ITR भरने के 5 बड़े फायदे।

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Income Tax

भारत में एक आम धारणा है कि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) केवल उन्हीं लोगों को भरना चाहिए जिनकी कमाई टैक्स के दायरे में आती है। अगर आपकी सालाना आय बेसिक छूट की सीमा (जैसे 2.5 लाख या 7 लाख रुपये, आपके चुने हुए टैक्स रिजीम के आधार पर) से कम है, तो आप शायद सोचते होंगे कि ITR भरने की क्या जरूरत है? लेकिन वित्तीय जानकारों की मानें तो "नील रिटर्न" (Nil ITR) फाइल करना आपकी वित्तीय सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। भले ही आपकी टैक्स देनदारी शून्य हो, लेकिन ITR फाइल करने के ये 5 फायदे आपकी जिंदगी और बैंकिंग के कामों को बहुत आसान बना सकते हैं। आइए आपको बताते हैं जीरो ITR भरने के 5 बड़े फायदे।

1. लोन अप्रूवल में मिलती है बड़ी मदद

जब भी आप किसी बैंक या वित्तीय संस्थान के पास होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो वे आपकी 'आमदनी की विश्वसनीयता' की जांच करते हैं। इसके लिए बैंक पिछले 2 से 3 सालों का ITR मांगते हैं। भले ही आपकी आय कम हो, लेकिन नियमित रूप से भरा गया ITR आपके एक "जिम्मेदार नागरिक" और "वित्तीय रूप से अनुशासित" होने का प्रमाण देता है। अगर आपके पास ITR रिकॉर्ड है, तो लोन मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है और कागजी कार्रवाई भी जल्दी पूरी होती है।

2. विदेशी वीजा (Visa) के लिए अनिवार्य दस्तावेज

अगर आप भविष्य में घूमने, पढ़ाई करने या नौकरी के सिलसिले में विदेश जाने की योजना बना रहे हैं, तो ITR आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगा। अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय देशों जैसे कई देशों के दूतावास वीजा आवेदन के दौरान आपसे पिछले 3 सालों का ITR मांगते हैं। यह इस बात का सबूत होता है कि आपकी आर्थिक स्थिति स्थिर है और आप अपने खर्चों को उठाने में सक्षम हैं। बिना ITR के कई बार वीजा मिलना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

3. TDS का रिफंड पाने का एकमात्र रास्ता

कई बार ऐसा होता है कि आपकी आय टैक्स के दायरे में नहीं होती, फिर भी बैंक आपकी एफडी (FD) के ब्याज पर या आपकी फ्रीलांसिंग इनकम पर टीडीएस (TDS) काट लेते हैं। अगर आपका यह पैसा सरकार के पास जमा हो गया है और आप इसे वापस (रिफंड) पाना चाहते हैं, तो इसका एकमात्र तरीका ITR फाइल करना ही है। जब आप अपना रिटर्न भरते हैं, तभी आयकर विभाग को पता चलता है कि आप पर कोई टैक्स नहीं बनता और वह कटा हुआ पैसा आपके खाते में वापस भेज देता है।

4. बिजनेस और निवेश के घाटे की भरपाई

शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या किसी छोटे व्यापार में आपको कभी घाटा (Loss) हो सकता है। इनकम टैक्स के नियमों के अनुसार, आप अपने इस साल के घाटे को अगले सालों के मुनाफे के साथ एडजस्ट कर सकते हैं, जिससे भविष्य में आपको कम टैक्स देना पड़ेगा। लेकिन इस 'लॉस कैरी फॉरवर्ड' की सुविधा का लाभ आप तभी उठा सकते हैं जब आपने समय पर अपना ITR फाइल किया हो। अगर आप रिटर्न नहीं भरते, तो आप अपने घाटे को एडजस्ट करने का कानूनी अधिकार खो देते हैं।

5. पते और आय का पुख्ता सरकारी सबूत

ITR को भारत में एक बहुत ही विश्वसनीय 'इनकम प्रूफ' और 'एड्रेस प्रूफ' माना जाता है। कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए लाइसेंस बनवाने या बड़ी बीमा पॉलिसी (Insurance) खरीदने के समय ITR को पहचान और आय के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाता है। प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियां भी बड़े कवर वाली पॉलिसी देने से पहले अक्सर ITR की मांग करती हैं ताकि वे आपकी रिस्क प्रोफाइल समझ सकें।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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