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Multi-Cap vs Flexi-Cap Funds: असली फर्क क्या है और निवेश के लिए कौन बेहतर? समझें

अक्सर निवेशक स्कीम चुनने को लेकर पास्ट रिटर्न के फैक्टर को अहमियत देता है और इस तरह, उनके रिस्क टोलरेंस, निवेश की अवधि और लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल लक्ष्यों को नजरअंदाज हो जाती हैं। जबकि निवेश के लिए एक सही स्कीम को चुनने के लिए ये सभी फैक्टर मायने रखते हैं।

Multi Cap vs Flexi Cap Funds

निवेश के लिए मल्टी कैप और फ्लेक्सी कैप फंड में अंतर को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। (Photo : iStock)

म्यूचुअल फंड्स निवेश का सबसे आसान तरीका माना जाता है। हालांकि, यह बहुत हद तक इतना भी आसान नहीं है। खासकर पहली बार निवेश करने वालों के लिए शुरुआती प्रक्रिया कुछ मुश्किल हो सकती है। यह परेशानी म्यूचुअल फंड योजनाओं की 2000 से अधिक संख्या की वजह से आती है। ये योजनाएं इक्विटी स्कीम्स, डेब्ट फंड्स, हाइब्रिड स्कीम्स और अन्य कैटेगरी में उपलब्ध होती हैं। वहीं, प्रत्येक कैटेगरी में फ्लेक्सी-कैप फंड, लार्ज-कैप फंड, मल्टी-कैप फंड और अन्य जैसे सब कैटेगरी भी मौजूद होती हैं। ऐसे में अक्सर निवेशक स्कीम चुनने में उनके रिस्क टोलरेंस, निवेश की अवधि और लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल लक्ष्यों को नजरअंदाज कर देता है।

इस आर्टिकल में मल्टी कैप और फ्लेक्सी कैप फंड में अंतर ही समझाने जा रहे हैं ताकि आप अपने लिए निवेश को लेकर एक सही फंड को चुन सकें।

Multi-Cap vs Flexi-Cap Funds

एक्सपोजर की बात करें तो फ्लेक्सी कैप फंड का कम से कम 65 प्रतिशत हिस्सा इक्विटी और इक्विटी-रिलेटेड इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करना जरूरी है और यह फंड मार्केट कैप के अनुसार निवेश करने की फ्लेक्सिबिलिटी रखता है। वहीं, दूसरी ओर मल्टी कैप फंड का कम से कम 75 प्रतिशत निवेश इक्विटी और इक्विटी-रिलेटेड इंस्ट्रूमेंट्स में होना चाहिए, इसमें लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप कैटेगरी प्रत्येक के लिए अनिवार्य न्यूनतम आवंटन 25 प्रतिशत होना चाहिए।

पोर्टफोलियो कम्पोजिशन

फ्लेक्सी कैप फंड लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप के बीच डायनामिक एसेट एलोकेशन के साथ एक्टिव रूप से मैनेज किया जाता है। वहीं, मल्टी कैप फंड में मार्केट कैपिटलाइजेशन के अनुसार फिक्स्ड मिनिमम एक्सपोजर के साथ संरचनात्मक रूप से डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो होता है।

रिस्क मैनेजमेंट

रिस्क मैनेजमेंट की बात करें तो फ्लेक्सी कैप फंड में अनिश्चित बाजार परिस्थितियों के दौरान लार्ज-कैप एक्सपोजर बढ़ाने की क्षमता के कारण तुलनात्मक रूप से कम वोलैटिलिटी रहती है। वहीं, दूसरी ओर, मल्टी कैप फंड मिड और स्मॉल-कैप शेयरों में न्यूनतम 50 प्रतिशत निवेश होने के कारण मल्टी कैप फंड में अधिक वोलैटिलिटी रहती है।

निवेश के लिए कौन सही

अगर आप मॉडरेट रिस्क टॉलरेंस के साथ फ्लेक्सिबिलिटी चाहते हैं और लार्ज-कैप ऑरिएंटेड कोर इक्विटी एलोकेशन की तलाश में हैं तो आपके लिए फ्लेक्सी कैप फंड सही विकल्प रहेगा। वहीं, अगर आप उच्च जोखिम लेने की क्षमता रखते हैं, लॉन्ग-टर्म का निवेश चाहते हैं और वोलैटिलिटी और ब्रॉडर डायवर्सिफिकेशन के साथ कंफर्टेबल हैं तो आपके लिए मल्टी कैप फंड का विकल्प सही रहेगा।

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शिवानी कोटनाला
शिवानी कोटनाला author

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने ... और देखें

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