वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए बिना किसी लेट फीस के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। अगर आप व्यस्तता या किसी अन्य वजह से इस समय सीमा तक अपना रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए हैं, तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत टैक्सपेयर्स को डेडलाइन मिस होने के बाद भी अपना रिटर्न फाइल करने का मौका दिया जाता है। इस प्रक्रिया को 'बिलेटेड रिटर्न' (Belated ITR) कहा जाता है, जिसे धारा 139(4) के तहत जमा किया जाता है। हालांकि, समय बीत जाने के बाद रिटर्न दाखिल करने पर टैक्सपेयर्स को कुछ पेनल्टी और नियमों का पालन करना पड़ता है।
कितनी लगेगी लेट फीस?
इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक, अगर आप 31 जुलाई के बाद बिलेटेड ITR फाइल करते हैं, तो धारा 234F के तहत लेट फीस लागू होती है। जिन टैक्सपेयर्स की कुल वार्षिक आय 5 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें 5,000 रुपये की लेट फीस देनी होगी। हालांकि, छोटे टैक्सपेयर्स को राहत देते हुए यह प्रावधान किया गया है कि अगर कुल आय 5 लाख रुपये या उससे कम है, तो पेनल्टी राशि केवल 1,000 रुपये होगी। अगर आपकी आय टैक्स योग्य सीमा से नीचे है, तो आपको कोई लेट फीस नहीं देनी होगी। बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2026 तय की गई है, जिसके बाद नॉर्मल बिलेटेड रिटर्न फाइल करना संभव नहीं होगा।
पेनल्टी के अलावा और क्या होगा नुकसान?
लेट फीस के अलावा, डेडलाइन मिस करने पर टैक्सपेयर्स को ब्याज का भुगतान भी करना पड़ सकता है। अगर 31 जुलाई तक आपका कोई टैक्स बकाया था और आपने उसका भुगतान नहीं किया है, तो धारा 234A के तहत 1 अगस्त से वास्तविक भुगतान की तारीख तक बकाया टैक्स राशि पर 1% प्रति माह की दर से साधारण ब्याज लागू होगा। इसके अतिरिक्त, समय पर ITR फाइल न करने का एक बड़ा नुकसान यह है कि आप चालू वित्त वर्ष में हुए स्टॉक मार्केट, बिजनेस या कैपिटल गेंस के घाटे (Losses) को अगले वर्षों के लिए 'कैरी फॉरवर्ड' (Carry Forward) नहीं कर सकेंगे। केवल हाउस प्रॉपर्टी के नुकसान को ही बिलेटेड रिटर्न में कैरी फॉरवर्ड करने की छूट मिलती है।
बिलेटेड ITR फाइल करने की प्रक्रिया बिल्कुल सामान्य रिटर्न की तरह ही होती है। इसके लिए आपको इनकम टैक्स विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाना होगा, अपने यूजर आईडी और पासवर्ड से लॉगिन करना होगा और 'File Income Tax Return' विकल्प चुनना होगा। फाइलिंग टाइप में 'Under Section 139(4)' यानी Belated Return चुनना अनिवार्य है। उपयुक्त ITR फॉर्म (ITR-1, ITR-2 आदि) का चयन करने के बाद, अपनी आय और कटौती की जानकारी सही-सही भरें, लागू लेट फीस का भुगतान करें और रिटर्न सबमिट कर दें। ध्यान रहे कि सबमिट करने के बाद 30 दिनों के भीतर e-Verification पूरा करना बेहद जरूरी है, वरना आपका रिटर्न अमान्य (Invalid) मान लिया जाएगा।
