पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर अज्ञात सरकारी अधिकारियों के हवाले से यह दावा किया जा रहा था कि भारत में एलपीजी (LPG) की आपूर्ति को सामान्य होने में लगभग चार साल का समय लग सकता है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Petroleum Ministry) ने इस दावे को पूरी तरह से भ्रामक और गलत करार दिया है। सरकार का कहना है कि इस तरह की खबरें जनता में बेवजह का डर और पैनिक पैदा करने के लिए फैलाई जा रही हैं, जबकि असलियत इसके बिल्कुल उलट है। देश में रसोई गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है और सप्लाई चेन पूरी तरह सुरक्षित है।
आयात के लिए नए देशों से हाथ मिलाया
सप्लाई को और अधिक मजबूत करने के लिए भारत ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब भारत केवल कुछ चुनिंदा देशों पर निर्भर नहीं है, बल्कि उसने अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से गैस आयात करने के लिए समझौते किए हैं। मंत्रालय के अनुसार, लगभग 800 टीएमटी (TMT) गैस का सुरक्षित स्टॉक पहले ही बुक किया जा चुका है और यह माल भारत के लिए रवाना हो चुका है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भविष्य में भी गैस की उपलब्धता को लेकर कोई संकट नहीं आने वाला है।
घरेलू उत्पादन में 40% का इजाफा
9 मार्च 2026 को जारी 'एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर' के तहत सरकार ने देश की सभी रिफाइनरियों को आदेश दिया है कि वे एलपीजी के उत्पादन को अधिकतम स्तर पर ले जाएं। इस कड़े निर्देश का असर यह हुआ है कि घरेलू स्तर पर एलपीजी का दैनिक उत्पादन 40 प्रतिशत तक बढ़ गया है। वर्तमान में भारत की रिफाइनरियां हर दिन 50 टीएमटी गैस का उत्पादन कर रही हैं, जबकि देश की कुल दैनिक मांग लगभग 80 टीएमटी है। शेष मांग को आयात के जरिए आसानी से पूरा किया जा रहा है।
रिकॉर्ड डिलीवरी और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर
आंकड़ों की बात करें तो मार्च महीने में हर दिन औसतन 50 लाख गैस सिलेंडरों की डिलीवरी की गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि देश के किसी भी हिस्से से एक भी डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर स्टॉक खत्म होने (Dry-out) की खबर नहीं मिली है। बुकिंग करने के बाद सिलेंडर मिलने का समय (Delivery Cycle) आज भी 5 से 6 दिन का बना हुआ है, जो सामान्य स्थिति को दर्शाता है। पिछले एक दशक में भारत का एलपीजी इन्फ्रास्ट्रक्चर दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा है। गैस कनेक्शनों की संख्या 14.52 करोड़ से बढ़कर 33.39 करोड़ हो गई है, वहीं वितरकों (Distributors) की संख्या भी 13,896 से बढ़कर 25,607 पहुंच गई है।
अफवाहों से सावधान रहने की सलाह
मंत्रालय ने नागरिकों को आगाह किया है कि वे सोशल मीडिया या अनधिकृत स्रोतों से फैलने वाली सूचनाओं पर भरोसा न करें। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह एक सुनियोजित 'गलत सूचना अभियान' (Misinformation Campaign) हो सकता है जिसका उद्देश्य समाज में अस्थिरता पैदा करना है। सरकार ने जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक चैनलों और मंत्रालय द्वारा जारी बयानों पर ही विश्वास करें। भारत की वर्तमान ढांचागत स्थिति पहले के किसी भी समय की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और लचीली है।
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