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Hormuz रास्ते से तेल ले जाने पर क्या Iran वसूल रहा Toll Tax? भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता

होर्मुज के जरिये तेल लाने वाले जहाजों से ईरान अनौपचारिक रूप से पैसा वसूल रहा है। इससे कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ने के बावजूद कीमत कम नहीं हो रही है। यह भारत जैसे प्रमुख आयातक देशों के लिए अच्छी खबर नहीं है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य

ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी युद्ध खत्म होने और सुलह की उम्मीद बढ़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जल्द युद्ध खत्म होने की बात कही है। इस बीच एक खबर आ रही है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल लाने के लिए ईरान टोल टैक्स वसूल रहा है। दरअसल, होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को लेकर डेटा एनालिटिक्स फर्म Kpler की रिपोर्ट ने वैश्विक बाजार में हलचल बढ़ा दी। रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी के कुछ देश अपने तेल टैंकरों को सुरक्षित निकालने के लिए ईरान को किसी तरह का अनौपचारिक भुगतान कर रहे हैं।

हालांकि, ईरान सरकार की तरफ से किसी आधिकारिक ‘Toll Tax’ की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) इस अत्यंत संवेदनशील समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से अनऑफिशियल ‘सिक्योरिटी फीस’ या सुरक्षा भुगतान ले रहा है। आधिकारिक टोल न होकर भी यह एक ऐसा अतिरिक्त आर्थिक बोझ है, जो तेल के अंतिम दाम को बढ़ा रहा है।

सप्लाई बढ़ी, फिर भी क्रूड महंगा क्यों?

बाजार में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद सप्लाई कमी थी लेकिन अब सप्लाई पुराने स्तर पर पहुंच गई है। इसके बावजूद कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है। इसकी वजह महंगा ट्रांसपोर्ट खर्च है। जानकारों का कहना है कि जब कोई टैंकर होर्मुज के जोखिम भरे क्षेत्र से गुजरता है, तो इंश्योरेंस कंपनियां 'वॉर रिस्क प्रीमियम' के नाम पर भारी शुल्क वसूल रही है। जब तक कोई जहाज पूरी सुरक्षा के साथ खरीदार के पोर्ट तक नहीं पहुंच जाता, तब तक उसका भाड़ा और बीमा लागत सामान्य से कई गुना अधिक रहती है। यानी, समस्या तेल की उपलब्धता की नहीं, बल्कि सुरक्षित डिलीवरी की है। इसी कारण तेल की कीमत कम नहीं हो रही है।

कब सस्ता होगा कच्चा तेल?

जहाज रातों-रात बनकर तैयार नहीं होते। जब तक होर्मुज में पूर्ण सुरक्षा बहाल नहीं होती, तब तक जहाजों की मांग ऊंची रहेगी और भाड़े की दरें कम नहीं होंगी। भारत के पास हालांकि रूस और गैर-खाड़ी देशों से तेल खरीदने का विकल्प और रणनीतिक तेल भंडार मौजूद हैं, लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर लॉजिस्टिक्स महंगी रहती है, तो भारत को भी इसका असर झेलना पड़ेगा। जब तक होर्मुज का यह समुद्री रास्ता पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता, तब तक अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमत में कमी नहीं आएगी।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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