Petrol-Diesel Excise Duty Cut Impact: सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इस फैसले से ईंधन की कीमतों को बढ़ने से रोका जा सकेगा, लेकिन इसका असर सरकारी खजाने पर पड़ेगा। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी के अनुसार, इस कटौती से सरकार को पखवाड़े (15 दिनों) में कुल मिलाकर करीब 5,500 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान होगा।
कैसे होगा राजस्व का नुकसान और कुछ भरपाई?
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के अनुसार सरकार के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने से करीब 7,000 करोड़ रुपये का राजस्व कम हो जाएगा। हालांकि, सरकार ने डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर शुल्क बढ़ाया है, जिससे करीब 1,500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी। इस तरह कुल नुकसान घटकर 5,500 करोड़ रुपये रह जाएगा। सरकार इन दरों की समीक्षा हर 15 दिन में करेगी, ताकि स्थिति के अनुसार बदलाव किए जा सकें।
अब पेट्रोल पर कितना टैक्स लग रहा है?
कटौती के बाद पेट्रोल पर कुल एक्साइज ड्यूटी 11.9 रुपये प्रति लीटर रह गई है। इसमें 1.40 रुपये बेसिक एक्साइज ड्यूटी, 3 रुपये विशेष अतिरिक्त शुल्क, 2.50 रुपये कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर और 5 रुपये सड़क एवं अवसंरचना उपकर शामिल हैं। वहीं, 26 मार्च से डीजल और एटीएफ पर क्रमशः 21.5 रुपये और 29.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया गया है।
सरकार का मकसद क्या है?
सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश में डीजल और एटीएफ की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में बाधा और अनिश्चितता के कारण यह फैसला लिया गया है। साथ ही, पेट्रोल-डीजल पर टैक्स घटाकर तेल कंपनियों के नुकसान (अंडर-रिकवरी) को कम करना और आम लोगों को कीमतों में बढ़ोतरी से बचाना भी इसका उद्देश्य है।
क्यों जरूरी हुआ यह फैसला?
हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। इसकी बड़ी वजह अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से वैश्विक सप्लाई प्रभावित होना है। कच्चे तेल की कीमत इस महीने करीब 50 प्रतिशत बढ़ गई और 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो बाद में घटकर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई।
तेल कंपनियों पर पड़ा असर
तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे गए, जिससे तेल विपणन कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस नुकसान का असर उनकी कार्यशील पूंजी पर भी पड़ने लगा था। ऐसे में सरकार ने टैक्स में कटौती करके कंपनियों को राहत देने और बाजार को संतुलित रखने की कोशिश की है।
आगे क्या हो सकता है?
सरकार का कहना है कि मौजूदा स्थिति सामान्य नहीं है और लगातार बदल रही है। इसलिए राजस्व और आपूर्ति का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू मांग को देखते हुए फैसलों में बदलाव संभव है। फिलहाल सरकार का फोकस आम जनता को राहत देने और देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने पर है।
