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Broadband Connection: ब्रॉडबैंड कनेक्शन के मामले में अमेरिका-चीन से बेहद पीछे है भारत, चाहिए 4.2 लाख करोड़

Broadband Connection: शहरी इलाकों में ब्रॉडबैंड की पहुंच 3.6 करोड़ घरों तक है जबकि ग्रामीण इलाकों में लगभग 30 लाख कनेक्शन हैं। अगर अमेरिका-चीन जैसे देशों में ब्रॉडबैंड कनेक्शन की बात की जाय तो वहां 92-97 फीसदी घरों तक पहुंच हो चुकी है।

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ब्रॉडबैंड कनेक्शन

Broadband Connection: देश में डिजिटल क्रांति होने के बावजूद अभी भी ब्रॉडबैंड कनेक्शन में भारत अमेरिका-चीन की तुलना में काफी पीछे हैं। और अगर सरकार को 2030 तक 24 करोड़ घरों तक ब्रॉडबैंड कनेक्शन पहुंचाना है तो उसके करीब 4.2 लाख करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी। देश में अभी शहरी इलाकों में ब्रॉडबैंड की पहुंच 3.6 करोड़ घरों तक है जबकि ग्रामीण इलाकों में लगभग 30 लाख कनेक्शन हैं। जबकि इन्हें साल 2030 तक शहरों में 10 करोड़ और ग्रामीण इलाकों में 15.3 करोड़ घरों तक पहुंचाने की जरूरत है। अगर अमेरिका-चीन जैसे देशों में ब्रॉडबैंड कनेक्शन की बात की जाय तो वहां 92-97 फीसदी घरों तक पहुंच हो चुकी है।

विकसित देशों का क्या है हाल

ईवाई ग्लोबल के दूरसंचार क्षेत्र प्रमुख एवं भागीदार प्रशांत सिंघल ने ‘ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम' (बीआईएफ) के सम्मेलन में कहा कि भारत में फिलहाल चार करोड़ घर ही ब्रॉडबैंड से जुड़े हुए हैं। जबकि अमेरिका में घरों तक ब्रॉडबैंड की पहुंच 92 प्रतिशत, चीन में 97 प्रतिशत, जापान में 84 प्रतिशत और जर्मनी में 82 प्रतिशत है। सिंघल के अनुसार भारत को वर्ष 2030 तक देश के 24 करोड़ घरों को ब्रॉडबैंड सेवाओं से जोड़ने के लिए 4.2 लाख करोड़ रुपये के भारी निवेश की जरूरत होगी।उन्होंने कहा कि 24 करोड़ घरों को हाई स्पीड वाली ब्रॉडबैंड सेवा से जोड़ने के लिए भारत को सभी तरह के डिजिटल संपर्क बुनियादी ढांचे पर निवेश करने होंगे।

कहां कितने निवेश की जरूरत

सिंघल ने कहा कि फाइबर बिछाने पर 2.7-3 लाख करोड़ रुपये, बुनियादी ढांचे पर 90,000-96,000 करोड़ रुपये, वाईफाई और इन-बिल्डिंग समाधान पर 6,600-9,000 करोड़ रुपये, डेटा सेंटर पर 9,700-14,100 करोड़ रुपये और उपग्रह ब्रॉडबैंड सेवाओं पर 26,000-29,000 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा।उन्होंने कहा कि USO फंड के अलावा सरकार जरूरी बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए सीएसआर फंड के उपयोग की अनुमति दे सकती है। इसका उपयोग डिजिटल शैक्षिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए भी किया जा सकता है।बीआईएफ के अध्यक्ष टीवी रामचंद्रन ने कहा कि देश में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड का मौजूदा ढांचा डेटा की बढ़ती खपत के साथ तालमेल नहीं बिठा सकता है। उन्होंने कहा कि हमें अगले छह साल में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शन में 20 प्रतिशत की न्यूनतम वार्षिक वृद्धि दर हासिल करनी होगी।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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