NITI Aayog on Scrap Recycling: नीति आयोग ने हाल ही में जारी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि भारत असंगठित कबाड़ (स्क्रैप) और रीसाइक्लिंग उद्योग में खराब प्रोसेसिंग और अक्षमताओं के कारण हजारों करोड़ रुपये के व्यावसायिक अवसर खो रहा है। आयोग ने विशेष रूप से ई-कचरा, बेकार टायर, लिथियम-आयन बैटरी और पुराने वाहनों के पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) क्षेत्रों में इस कमी को उजागर किया है।
ई-कचरा: बढ़ती समस्या और सीमित क्षमता
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सालाना करीब 62 लाख टन ई-कचरा उत्पन्न होता है। यह संख्या तेजी से बढ़ रही है और अनुमान है कि 2030 तक यह 1.4 करोड़ टन तक पहुंच जाएगा। ई-कचरे का कुल मूल्य करीब 51,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें से 60 प्रतिशत को पुनः इस्तेमाल या रीसाइक्लिंग के लिए निकाला जा सकता है। हालांकि मौजूदा कचरा ‘रिकवरी सिस्टम’ केवल 18 प्रतिशत ई-कचरे को ही संसाधित कर पा रहा है। इसका मतलब है कि देश रीसाइक्लिंग के इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आर्थिक अवसर गंवा रहा है। आयोग ने रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि कमजोर कार्यबल प्रणालियां और गुणवत्ता मानकों की कमी मुख्य कारण हैं, जिससे ई-कचरा पर्याप्त रूप से पुनः उपयोग नहीं हो पा रहा।
बेकार टायर: मानक की कमी से नुकसान
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत में बेकार टायरों के रीसाइक्लिंग में देश को करीब 7,500 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि पुनः उपयोग किए जाने वाले उत्पादों के लिए स्पष्ट मानक और गुणवत्ता नियंत्रण की कमी है। नीति आयोग का कहना है कि अगर टायर रीसाइक्लिंग उद्योग में उचित मानक बनाए जाएं, तो यह न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगा बल्कि आर्थिक अवसर भी बढ़ाएगा।
अन्य क्षेत्रों में रीसाइक्लिंग की संभावनाएं
नीति आयोग ने लिथियम-आयन बैटरी और बेकार वाहनों के रीसाइक्लिंग की भी समीक्षा की। रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में संसाधनों के बेहतर उपयोग की बड़ी क्षमता मौजूद है, लेकिन अभी तक सही तकनीक और कार्यबल की कमी के कारण यह पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाए हैं। आयोग ने सरकार को सुझाव दिया है कि इन क्षेत्रों में सुधार के लिए नीतिगत पहल और तकनीकी निवेश की आवश्यकता है।
सर्कुलर अर्थव्यवस्था में सुधार की जरूरत
नीति आयोग ने सर्कुलर अर्थव्यवस्था यानी संसाधनों के अधिकतम उपयोग वाली अर्थव्यवस्था पर जोर दिया है। आयोग के कार्यक्रम प्रमुख (हरित बदलाव) प्रियव्रत भाटी ने बताया कि रीसाइक्लिंग क्षेत्र की कमियों में कमजोर कार्यबल प्रणालियां, गुणवत्ता मानकों की कमी और आधुनिक उपकरणों की अनुपस्थिति प्रमुख हैं। रिपोर्ट में सरकार के लिए सुधारात्मक कदम उठाने की सिफारिश की गई है ताकि देश रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में आर्थिक अवसरों का पूरा लाभ उठा सके।
रिपोर्ट जारी: IMRC-2026 में
नीति आयोग की यह रिपोर्ट इंटरनेशनल मटेरियल रीसाइक्लिंग कॉन्फ्रेंस (IMRC-2026) में जारी की गई। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम मैटेरियल रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MARIA) द्वारा आयोजित किया गया था, जो गुरुवार को संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में विभिन्न विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया और भारत में रीसाइक्लिंग उद्योग की वर्तमान स्थिति तथा संभावनाओं पर चर्चा की।
बड़े अवसर और सुधार की जरुरत
नीति आयोग की रिपोर्ट साफ कर देती है कि भारत का रीसाइक्लिंग उद्योग अभी अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहा। ई-कचरा, टायर, बैटरी और पुराने वाहनों के क्षेत्र में कमजोर कार्यबल और मानकों की कमी के कारण देश हर साल बड़े आर्थिक अवसर खो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन कमियों को दूर किया जाए, तो न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा बल्कि रीसाइक्लिंग से जुड़े उद्योगों में हजारों करोड़ रुपये का कारोबार बढ़ाया जा सकता है। इस तरह नीति आयोग ने रीसाइक्लिंग क्षेत्र में सुधार की जरूरत और आर्थिक संभावनाओं पर जोर दिया है।
