म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश शुरू करने से पहले सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर हर महीने कितनी राशि निवेश करनी चाहिए। कई लोग मानते हैं कि वेतन का 20% या 30% निवेश करना सही रहता है, जबकि कुछ लोग एक तय SIP राशि को आदर्श मानते हैं। लेकिन जानकारों की मानें तो म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए कोई एक तय या परफेक्ट राशि नहीं होती। सही निवेश राशि हर व्यक्ति की आय, खर्च, वित्तीय लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
कैसे करें निवेश की शुरुआत
निवेश की शुरुआत किसी तय प्रतिशत से नहीं, बल्कि वित्तीय लक्ष्यों से की जानी चाहिए। निवेशकों को यह पता होना चाहिए कि वे उद्देश्य के लिए निवेश कर रहे हैं। उदाहरण के लिए लक्ष्य बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदना, रिटायरमेंट या लंबी अवधि में संपत्ति बनानी है तो उसी के अनुसार निवेश की राशि तय की जानी चाहिए। जब लक्ष्य स्पष्ट होता है तब यह समझना आसान होता है कि हर महीने कितनी SIP करनी होगी।
कैसे तय करें निवेश की राशि
निवेश की राशि तय करते समय मासिक आय और खर्च का भी ध्यान रखा जाना जरूरी है। सबसे पहले जरूरी खर्चों, ईएमआई और इमरजेंसी फंड की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके बाद बची हुई राशि में से नियमित निवेश की योजना बनाई जा सकती है। अगर शुरुआत में अधिक निवेश करना संभव नहीं है, तो छोटी राशि से भी शुरुआत की जा सकती है। समय के साथ जब आय बढ़े तो SIP की राशि भी बढ़ाना एक बेहतर रणनीति मानी जाती है।
सही SIP राशि हर किसी के लिए अलग-अलग
जानकारों की मानें तो केवल किसी दूसरे व्यक्ति की निवेश राशि देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। किसी व्यक्ति की आय, जिम्मेदारियां और वित्तीय लक्ष्य आपसे बिल्कुल अलग हो सकते हैं। इसलिए हर निवेशक के लिए सही SIP राशि भी अलग होती है। यही कारण है कि किसी एक निश्चित रकम को सभी के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता।
जोखिम उठाने की क्षमता होगी महत्वपूर्ण
म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय जोखिम उठाने की क्षमता (Risk Appetite) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अगर व्यक्ति अधिक जोखिम ले सकता है और लंबी अवधि का निवेश कर सकता है तो इक्विटी म्यूचुअल फंड बेहतर विकल्प हो सकते हैं। वहीं, कम जोखिम पसंद करने वाले निवेशक डेट या हाइब्रिड फंड पर विचार कर सकते हैं। इसलिए निवेश राशि तय करने के साथ-साथ सही फंड का चयन भी उतना ही जरूरी है।
हालांकि, यह भी समझें कि म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेश करना हमेशा फायदेमंद नहीं होता। कई बार अलग-अलग फंड में एक जैसी कंपनियों के शेयर शामिल होते हैं, जिससे डायवर्सिफिकेशन नहीं हो पाता। इसलिए कम लेकिन अच्छी तरह चुनी गई स्कीम के साथ अनुशासित निवेश करना अधिक प्रभावी माना जाता है।
