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पेट्रोल पंप की जमीन के नीचे कितना तेल भरा जा सकता है? इतने दिन का होता है स्टॉक

जमीन के नीचे तेल होने के कारण सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। इन टैंकों में 'ऑटोमैटिक टैंक गेजिंग' (ATG) सिस्टम लगा होता है, जो हर पल तेल के लेवल और तापमान की जानकारी देता है। साथ ही, यह सिस्टम यह भी पता लगा लेता है कि कहीं टैंक में पानी तो नहीं मिल गया है। इन टैंकों की हर 7 साल में लीकेज टेस्टिंग की जाती है ताकि जमीन और पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे।

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Petrol Pump

जब भी हम पेट्रोल पंप पर अपनी गाड़ी में तेल भरवाने जाते हैं, तो हम सिर्फ डिस्पेंसिंग मशीन और नोजल को देखते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस जमीन पर आप खड़े हैं, उसके नीचे कितना तेल जमा है? पेट्रोल पंप का असली 'खजाना' जमीन के नीचे बने बड़े लोहे या फाइबरग्लास के टैंकों में होता है। अक्सर सोशल मीडिया पर अफवाहें उड़ती हैं कि शहर में तेल खत्म होने वाला है, जिससे पंपों पर लंबी लाइनें लग जाती हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि एक पेट्रोल पंप की स्टोरेज क्षमता कितनी होती है और वहां कितने दिनों का बैकअप मौजूद रहता है।

अंडरग्राउंड टैंक की कैपेसिटी

एक सामान्य पेट्रोल पंप की जमीन के नीचे एक नहीं, बल्कि कई टैंक होते हैं। इन टैंकों की क्षमता पंप की लोकेशन और वहां होने वाली बिक्री पर निर्भर करती है। आमतौर पर, एक शहर के पेट्रोल पंप पर 20,000 लीटर से लेकर 70,000 लीटर तक की क्षमता वाले टैंक होते हैं। बड़े और व्यस्त हाईवे वाले पंपों पर यह क्षमता 1,00,000 लीटर या उससे भी अधिक हो सकती है। इन टैंकों को अलग-अलग हिस्सों (Compartments) में बांटा जाता है ताकि पेट्रोल और डीजल को सुरक्षित रूप से अलग रखा जा सके।

कितने दिनों का होता है स्टॉक?

पेट्रोल पंप पर स्टॉक रखने का कोई एक निश्चित नियम नहीं है, लेकिन तेल कंपनियां (जैसे IOCL, BPCL, HPCL) यह सुनिश्चित करती हैं कि किसी भी समय कम से कम 2 से 3 दिन का 'वर्किंग स्टॉक' मौजूद रहे। अगर किसी पंप पर रोजाना 5,000 लीटर पेट्रोल बिकता है, तो वहां कम से कम 15,000 लीटर का स्टॉक हमेशा मेंटेन किया जाता है। जैसे ही स्टॉक एक तय सीमा से नीचे जाता है, सिस्टम ऑटोमैटिक तरीके से कंपनी के डिपो को अलर्ट भेज देता है और कुछ ही घंटों में टैंकर के जरिए रिफिलिंग कर दी जाती है। मार्च 2026 की वर्तमान स्थितियों (जैसे मिडिल ईस्ट संकट) के बावजूद, सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास पर्याप्त राष्ट्रीय भंडार है, इसलिए पंपों पर थोड़े समय की किल्लत केवल 'पैनिक बाइंग' (घबराहट में ज्यादा खरीदारी) के कारण होती है।

क्या होता है 'डेड स्टॉक'

आपने गौर किया होगा कि कभी-कभी टैंक में तेल होने के बावजूद पंप संचालक कहते हैं कि "तेल खत्म हो गया है"। दरअसल, हर टैंक में कुछ मात्रा में तेल हमेशा बचा कर रखना पड़ता है जिसे 'डेड स्टॉक' कहते हैं। यह टैंक की कुल क्षमता का लगभग 5% से 10% हो सकता है। इसे इसलिए नहीं निकाला जाता क्योंकि टैंक के बिल्कुल निचले हिस्से में कचरा, मिट्टी या नमी (Water) जमा हो सकती है। अगर पंप का सक्शन पाइप बिल्कुल नीचे से तेल खींचेगा, तो यह गंदगी आपकी गाड़ी के इंजन में जाकर उसे नुकसान पहुंचा सकती है।

जमीन के नीचे तेल होने के कारण सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। इन टैंकों में 'ऑटोमैटिक टैंक गेजिंग' (ATG) सिस्टम लगा होता है, जो हर पल तेल के लेवल और तापमान की जानकारी देता है। साथ ही, यह सिस्टम यह भी पता लगा लेता है कि कहीं टैंक में पानी तो नहीं मिल गया है। इन टैंकों की हर 7 साल में लीकेज टेस्टिंग की जाती है ताकि जमीन और पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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