बिजनेस

ट्रंप टैरिफ के बीच कपड़ा कारोबारियों को बड़ी राहत, साल के अंत तक इंपोर्ट पर नहीं देनी होगी ड्यूटी

ट्रंप टैरिफ के बीच कपड़ा निर्यातकों और उद्योग को समर्थन देने के लिए यह फैसला लिया गया है। भारत के टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र का देश की जीडीपी में लगभग 2% योगदान है और यह रोजगार के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है। सरकार ने पहले 19 अगस्त से 30 सितंबर 2025 तक कॉटन इम्पोर्ट ड्यूटी पर अस्थायी छूट दी थी। अब इस छूट को तीन महीने और बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 तक लागू कर दिया गया है।

Image

Cotton Import

केंद्र सरकार ने कपड़ा उद्योग को राहत देने के लिए कॉटन (कपास) पर इम्पोर्ट ड्यूटी से छूट की अवधि 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दी है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में कहा गया कि इस कदम का उद्देश्य घरेलू टेक्सटाइल सेक्टर को पर्याप्त मात्रा में कॉटन उपलब्ध कराना है।

दरअसल, सरकार ने पहले 19 अगस्त से 30 सितंबर 2025 तक कॉटन इम्पोर्ट ड्यूटी पर अस्थायी छूट दी थी। अब इस छूट को तीन महीने और बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 तक लागू कर दिया गया है।

क्यों लिया गया फैसला

कपड़ा निर्यातकों और उद्योग को समर्थन देने के लिए यह फैसला लिया गया है। भारत के टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र का देश की जीडीपी में लगभग 2% योगदान है और यह रोजगार के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है।

कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) के चेयरमैन राकेश मेहरा ने कहा था कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है, जहां भारतीय टेक्सटाइल और परिधान उत्पादों की हिस्सेदारी लगभग 28% है। वित्त वर्ष 2024-25 में अकेले अमेरिका को भारत ने करीब 11 अरब डॉलर का निर्यात किया था। हालांकि, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाया हुआ है, जबकि वियतनाम और बांग्लादेश पर यह दर सिर्फ 20% है।

CITI की सेक्रेटरी जनरल चंद्रिमा चटर्जी ने कहा कि उद्योग संगठनों की लगातार अपील के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा, “यह भारतीय उद्योग के लिए एक बड़ी राहत है। इससे न सिर्फ घरेलू कंपनियों को मदद मिलेगी बल्कि अमेरिका के साथ चल रही बातचीत को भी सकारात्मक संदेश मिलेगा।”

टेक्सटाइल उद्योग का कहना है कि यह छूट फिलहाल राहत तो देगी, लेकिन लंबे समय तक समाधान तभी मिलेगा जब अमेरिका के साथ एक स्थायी व्यापार समझौता हो जाएगा।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article