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विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली जारी, जून में अबतक निकाले ₹62,853 करोड़, जानें आगे क्या?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये में लगातार गिरावट भी निकासी की प्रमुख वजह है। भारतीय मुद्रा वर्ष 2026 में अब तक लगभग छह प्रतिशत और पिछले एक वर्ष में करीब 10 प्रतिशत कमजोर हुई है।

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पूंजी निकासी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया कोशिशों के बावजूद विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार से पैसा निकालने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने जून के पहले पखवाड़े में भारतीय शेयर बाजार से 62,853 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है। मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंताओं और रुपये की लगातार कमजोरी के चलते विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे हैं।

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से लगभग 2.87 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। यह राशि पूरे वर्ष 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से भी कहीं अधिक है।

आंकड़ों के अनुसार, फरवरी को छोड़कर 2026 के हर महीने में एफपीआई शुद्ध विक्रेता रहे हैं। जनवरी में उन्होंने भारतीय शेयर बाजार से 35,962 करोड़ रुपये निकाले थे, जबकि फरवरी में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों का सबसे बड़ा मासिक निवेश था। हालांकि मार्च में रुख फिर बदल गया और विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की निकासी की। इसके बाद अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मई में 32,963 करोड़ रुपये की निकासी हुई। जून के पहले दो सप्ताह में ही निकासी 62,853 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।

आगे को लेकर क्या है आउटलुक?

बजाज ब्रोकिंग के उपाध्यक्ष (शोध) पबित्रो मुखर्जी ने कहा कि आने वाले सप्ताह में एफपीआई निवेश प्रवाह अमेरिकी-ईरान शांति वार्ता, अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के नीतिगत फैसले, बैंक ऑफ जापान की ब्याज दर समीक्षा तथा प्रमुख केंद्रीय बैंकों की टिप्पणियों पर निर्भर करेगा।

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रमुख, प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों की दिशा, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक वृद्धि संबंधी चिंताओं के कारण निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम कम करने की रणनीति अपनाते हुए उभरते बाजारों से धन निकालकर विकसित बाजारों और अपेक्षाकृत सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं।

रुपये में बड़ी गिरावट ने मूड खराब किया

विश्लेषकों के अनुसार, अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय शेयरों का अपेक्षाकृत ऊंचा मूल्यांकन भी विदेशी निवेशकों के अधिक सतर्क रुख का कारण बना है।

शेयर बाजार से निकासी के उलट जून के पहले पखवाड़े में एफपीआई ने एफएआर मार्ग के जरिये बॉन्ड प्रतिभूतियों में 13,200 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। इस मार्ग से वर्ष 2026 में अब तक कुल निवेश लगभग 28,000 करोड़ रुपये पहुंच चुका है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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