FII Net Buyers: विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) लगातार दूसरे महीने भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदार बने। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के अनुसार, मई 30 तक एफआईआई ने 18,082 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। अप्रैल में 4,243 करोड़ रुपये की खरीदारी के बाद यह पॉजिटिव ट्रेंड इस तिमाही में कैपिटल मार्केट में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। वर्ष की शुरुआत में भारी बिकवाली के बाद यह बदलाव निवेशकों के लिए उत्साहजनक है।
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साल 2025 की शुरुआत में बिकवाली
2025 के पहले तीन महीनों में एफआईआई भारतीय बाजार में लगातार बिकवाल बने। जनवरी में डॉलर इंडेक्स के 111 के शिखर पर पहुंचने के साथ एफआईआई ने 78,027 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची।
वैश्विक ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और मजबूत डॉलर की चिंताओं ने इस बिकवाली को बढ़ावा दिया। हालांकि, वैश्विक मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतकों में नरमी, जैसे अमेरिका में मुद्रास्फीति में कमी और ब्याज दरों में स्थिरता, ने बिकवाली की तेजी को कम किया।
'निवेशकों का विश्वास बढ़ाया'
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार के मुताबिक वैश्विक स्तर पर डॉलर की कमजोरी, अमेरिका और चीन की अर्थव्यवस्थाओं में मंदी, और भारत में हाई जीडीपी ग्रोथ, घटती मुद्रास्फीति और स्थिर ब्याज दरें जैसे घरेलू मैक्रोइकॉनॉमिक कारक एफआईआई की वापसी के प्रमुख कारण हैं। इन कारकों ने भारत के प्रति निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है।
क्या करें निवेशक
एफआईआई की सकारात्मक गतिविधि भारतीय विकास की कहानी में नया आत्मविश्वास दर्शाती है। मजबूत आर्थिक फंडामेंटल्स और स्थिर मैक्रोइकॉनॉमिक कंडीशन भारतीय बाजार को आकर्षक बनाए हुए हैं। निवेशकों को वैश्विक और घरेलू आर्थिक रुझानों पर नजर रखते हुए अपनी रणनीति तैयार करनी चाहिए।
