ET NOW ग्लोबल बिजनेस समिट में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, आज देश रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार होकर विकसित भारत के सफर पर निकल चुका है। उन्होंने कहा, सरकार हर मोर्चे पर सुधारों में जुटी है। पिछले एक वर्ष में ही इनकम टैक्स से लेकर GST तक हर मोर्चे पर बड़े सुधार देश ने देखे हैं। इसके अलावा FDI से लेकर FTA तक भारत ने बिजनेस के मोर्चे पर भी सुधार किए हैं। उन्होंने बताया कि नीतियों से लेकर प्रॉसेस तक हर जगह आम आदमी और कारोबारियों पर कंप्लायंस का बोझ कम करना सरकार का मंत्र है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व मे सरकार ध्येय विकास के साथ विरासत को बचाकर रखना है। इसके लिए भारत ने अपनी शर्तों पर तमाम देशों के साथ FTA और ट्रेड डील की हैं।
भारत के हित में हैं FTA
पीयूष गोलय ने भारत के तमाम देशों के साथ किए गए ट्रेड समझौतों को लेकर कहा कि भारत ने तमाम देशों के साथ ऐसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) किए जो, दुनिया में कभी नहीं हुए। गोयल ने स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन जैसे स्कैंडेवियन देशों के साथ हुए FTA की की मिसाल देते हुए कहा कि यह पहली बार हुआ है, जब FTA करने वाले देश भारत में 100 अरब डॉलर FDI के लिए विधिक रूप से बाध्य हैं। अगर वे तय समय में निवेश नहीं करते हैं, तो भारत FTA में दी जाने वाली छूट खत्म कर सकता है। ऐसा दुनिया में पहले कभी नहीं हुआ। यह भारत ने किया, क्योंकि FTA भविष्य के लिए होते हैं और भारत बिजनेस का भविष्य है। उन्होंने कहा, सभी FTA 3 प्रिंसिपल्स पर आधारित हैं , विश्वास, पारदर्शिता और समयबद्ध निश्चितता। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत ने जो ट्रेड डील की हैं, उनसे भारत के लिए दुनिया का 70% बाजार खुल गया है।
30 ट्रिलियन डॉलर की होगी इकोनॉमी
गोयल ने बताया कि क्यों तमाम देश भारत के साथ FTA कर रहे हैं। उन्होंने कहा आज तमाम देश भारत में निवेश के लिए प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं। क्योंकि, भारत आज दुनिया की चौथी बड़ी इकोनॉमी है, जल्द ही यह दुनिया की तीसरी बड़ी इकोनॉमी बनेगा और भारत आज की 4 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 2047 तक भारत 30 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनेगा, जहां विकास की अपार संभावनाएं होंगी।
यूएस ट्रेड डील पर क्या बोले?
पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील पर बात करते हुए कहा, भारत ने सभी ट्रेड डील अपनी शर्तों पर की हैं। उन्होंने कहा भारत जिन विकसित देशों के साथ FTA या ट्रेड डील कर रहा है, वे हमें जरूरत की चीजों के अलावा कुछ भी नहीं बेच सकते हैं। उन्होंने कहा, भारत की पर कैपिटा इनकम फिलहाल 3 हजार डॉलर के आसपास है, जबकि इन देशों की पर कैपिटा 1 लाख डॉलर के आसपास है। ऐसे में ये देश हमारे उद्योगों को नुकसान नहीं पहुंचा सकते, क्योंकि इन देशों पास भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम उत्पाद बनाने क्षमता नहीं है। भारत के लिए ये देश सस्ते उत्पाद नहीं बना सकते। ऐसे में इन देशों से भारत सिर्फ जरूरत की चीजें ही खरीदेगा।
संवेदनशील क्षेत्रों FTA से बाहर
पीयूष गोयल ने बताया कि भारत ने किसी भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट या ट्रेड डील में देश की इकोनॉमी और समाज से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों के साथ कोई समझौता नहीं किया है। भारत ने कभी डेयरी सेक्टर को FTA के तहत नहीं खोला है। भारत दुनिया का अकेला देश है, जिसने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, ईयू और अमेरिका किसी के लिए भी डेयरी सेक्टर को नहीं खोला, क्योंकि यह भारत के छोटे किसानों के लिए बेहद अहम है। उन्हें किसी तरह का नुकसान नहीं हो, इस बात का फ्री ट्रेड डील में पूरा ध्यान रखा गया है।
टेक्सटाइल सेक्टर पर क्या कहा?
पीयूष गोयल ने टेक्सटाइल सेक्टर की ग्रोथ पर चर्चा करते हुए कहा, लंबे समय से इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है कि भारत का टेक्सटाइल सेक्टर ग्रो नहीं कर रहा है। इस मामले में भारत वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से भी मुकाबला नहीं कर पा रहे थे। लेकिन, FTA के तहत अब टेक्सटाइल सेक्टर के लिए यूरोप का बाजार खुला है, अब भारतीय टेक्सटाइट इंडस्ट्री भी बिना किसी ड्यूटी के और यूरोप और अमेरिका में अपने प्रोडक्ट बेच पाएगी। गोयल ने कहा कि ट्रेड डील और FTA की वजह से टेक्सटाइल सेक्टर में 70 से 80 लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
डेटा सेंटर ग्रोथ में अहम
पीयूष गोयल ने बजट में डेटा सेंटर्स के लिए की गई घोषणाओं को देश की इकोनॉमी और जॉब मार्केट के लिए बूस्टर बताते हुए कहा, डेटा सेंटर्स को बनाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर चाहिए, ऊर्जा, चाहिए। इस तरह यह एक पूरा इकोसिस्टम है, जो इन्वेस्टमेंट, इन्फ्रास्ट्रक्चर और नौकरियों के अवसर लेकर आएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा, AI इंसानों की जगह नहीं लेने वाला है। बल्कि यह नए तरह के अवसर लेकर आया है। हम AI टेक्नोलॉजी के एडॉप्शन में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
क्या है ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट?
13 और 14 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के ताज पैलेस होटल में टाइम्स ग्रुप की तरफ से आयोजित यह कार्यक्रम देश के कारोबारी, विश्लेषक और नीति निर्माताओं का मंच है। इस साल समिट की थीम 'A Decade of Disruption . A Century of Change 'है। इसके जरिये देश और दुनिया के बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट, पॉलिसी मेकर, एक्सपर्ट और थिंकर आने वाले समय की चुनौतियों, नए अवसरों, टेक्नोलॉजी के असर, वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर चर्चा कर रहे हैं।
