Rupee vs Dollar: भारतीय बाजार चौतरफा दबाव में दिख रहा है। बाजार की कमजोरी सिर्फ इक्विटी तक सीमित नहीं है, बल्कि फॉरेक्स मार्केट में रुपये पर भी दबाव बढ़ रहा है। इक्विटी मार्केट के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिल रही है। वहीं, फॉरेक्स मार्केट में डॉलर के मुकाबले रुपया भी लगातार कमजोर हो रहा है। मंगलवार को इंटरबैंक करेंसी एक्सचेंज के हिसाब से रुपया 91.05 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया है।
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 91.05 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में ही रुपया 90 से 91 तक फिसल गया है। बीते एक महीने में भारतीय मुद्रा में डॉलर के मुकाबले 2 फीसदी से ज्यादा की कमजोरी आ चुकी है। जबकि, साल-दर-साल (YoY) गिरावट 6% के आसपास पहुंच गई है। शेयर बाजार और रुपया दोनों आपस में एक दूसरे के लिए निवेशकों के सेंटिमेंट को कमजोर कर रहा है।
भारतीय बाजार में मंगलवार को बेंचमार्क इंडेक्स 400 अंकों से ज्यादा टूटकर 84,751.70 के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं, निफ्टी 26,000 का अहम स्तर तोड़कर 25,870.45 के इंट्रा डे लो तक फिसल गया है। BSE पर कारोबार के महज पहले आधे घंटे में निवेशकों की संपत्ति करीब 2 लाख करोड़ रुपये घट गई. खासतौर पर फाइनेंशियल्स, मेटल्स और IT शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिल रहा है।
रुपये की कमजोरी के पीछे 5 बड़ी वजहें
1. FII की लगातार बिकवाली
दिसंबर में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। इक्विटी से पूंजी निकासी की वजह से न सिर्फ शेयर बाजार पर दबाव बना है, बल्कि डॉलर की मांग बढ़ी है, जिससे रुपये में भी कमजोर आई है.
2. भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अनिश्चितता
रुपये में भरोसे की सबसे बड़ी दरार भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर बनी अनिश्चितता से जुड़ी है। किसी नए आर्थिक झटके के बिना भी डील की प्रगति पर तस्वीर साफ नहीं होने की वजह से निवेशक सतर्क बने हुए हैं।
3. बढ़ता ट्रेड डेफिसिट
गोल्ड और सिल्वर की बंपर रैली की वजह से भारत का इंपोर्ट बिल लगातार बढ़ता दिख रहा है, जिसकी वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था में डॉलर की मांग बढ़ गई है। वहीं, दूसरी तरफ कमजोर रुपये के बाद भी अमेरिकी टैरिफ के चलते निर्यात पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
4. हेजिंग बढ़ा रहे आयातक
डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही कमजोरी की वजह से आयातक ज्यादा आक्रामक तरीके से डॉलर हेजिंग कर रहे हैं। इसकी वजह से रुपये पर और दबाव बढ़ रहा है। वहीं, एक्सपोर्टर बेहतर रेट की उम्मीद में डॉलर सप्लाई करने से बच रहे हैं, जिससे बाजार में डॉलर की तंगी और गहराती जा रही है।
5. कमजोर ग्लोबल संकेत
एशियाई बाजारों में कमजोरी और सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार की गिरावट ने भी घरेलू बाजार में सेंटिमेंट को नेगेटिव किया है। निवेशक इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी जॉब्स मार्केट और महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जो आगे चलकर वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों की दिशा तय कर सकते हैं।
आगे क्या?
रुपये की चाल अब काफी हद तक वैश्विक संकेतों पर निर्भर है। वहीं, घरेलू बाजार में FII के फ्लो और भारत-अमेरिकी के बीच ट्रेड इसके लिए दिशा तय करने वाले अहम फैक्टर हैं। जब तक इन मोर्चों पर तस्वीर साफ नहीं होती है, तब तक करेंसी और शेयर मार्केट दोनों में उतार-चढ़ाव बना रहना तय माना जा रहा है।
